नई दिल्ली: पाकिस्तान के शहर कराची के ल्यारी टाउन के गैंगवार पर बेस्ड रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्ता और अर्जुन रामपाल जैसी बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म धुरंधर ने इन दिनों Box Office पर धूम मचाई हुई है। फिल्म देखकर दर्शक खुश हो रहे हैं कि कैसे भारत का भेजा हुआ एजेंट कराची का किंग बनने के करीब पहुंच गया। अगर आपको धुरंधर की कहानी अच्छी लगी तो हम आपको इससे भी तगड़ी कहानी बताते हैं। इस आर्टिकल में उस एजेंट की कहानी पढ़ लीजिए जिसे “The Greatest Spy” माना जाता है। वह एक ऐसा शख्स था, जिसके मर जाने के 60 साल बाद भी उसके खुफिया दस्तावेज वापस पाने के लिए दुश्मन देश में कोवर्ट ऑपरेशन चलाना पड़ा। ये स्टोरी है खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट एली कोहेन की जो कभी इजरायल के दुश्मन देश सीरिया के उप-रक्षामंत्री बनने वाले थे।
मिस्र में पैदा हुए एली IDF तक कैसे पहुंचे?
6 दिसंबर 1924 को मिस्र के एलेक्जेंड्रिया में पैदा हुए एली शुरुआत से ही तेज दिमाग, कई भाषाएं बोलने वाले और बेहद बहादुर थे। मिस्र से यहूदियों को निकालने में उनका अहम रोल रहा लेकिन स्वेज Crisis के बाद उन्हें मिस्र को छोड़कर इजरायल भागना पड़ा। IDF ने उन्हें वहां काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट में रखा। एली को एनालिस्ट और ट्रांसलेटर का काम दिया लेकिन उनकी असली चमक तो अभी दुनिया के सामने आनी बाकी थी।
मोसाद ने रिजेक्ट किया तो छोड़ दी नौकरी
IDF में काम कर-करके जब एली ऊब गए तो उन्होंने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद में शामिल होने की ठानी। लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। इस बात से एली इतना हर्ट हुए कि उन्होंने IDF भी छोड़ दी। एली सबकुछ छोड़कर इंश्योरेंस कंपनी में काम करने लगे।
बड़े ऑपरेशन के लिए क्यों चुने गए एली कोहेन
एली के IDF छोड़ने के करीब 2 साल बाद मोसाद के डायरेक्टर मायर अमीत एक ऐसे ऑपरेटिव की खोज कर रहे थे, जो नामुमकिन को मुमकिन कर सके यानी दुश्मन देश सीरिया की सरकार में घुसपैठ कर सके। और तभी उन्हें मिला एली का पोर्टफोलियो, जिनकी थी हिब्रू, अरबी, फ्रेंच पर पकड़ और अरब दुनिया की गहरी समझ। मानो यह मिशन ऊपरवाले ने एली के लिए ही लिखा हो।
दुश्मन देश में एली ने कैसे बनाई पैठ
फिर मोसाद ने एली कोहेन को एक नई पहचान दी और वह बन गए कामेल अमीन थाबेत, सीरिया का एक अमीर बिजनेसमैन, जो अपने देश के लिए कुछ करना चाहता था। उस वक्त किसी यहूदी का सीरिया में घुसना असंभव जैसा था, इसलिए पहले उन्हें साउथ अमेरिका के देश अर्जेंटीना भेजा गया, जहां सीरियन आर्मी और सीरिया में बैन हो चुकी बाथ पार्टी के बड़े नेता जमा होते थे। एली कोहेन ने देखते ही देखते वहां अरबी समुदाय में अपनी पैठ बनाई, बाथ पार्टी के नेताओं से दोस्ती की, और उस आर्मी-नेताओं के सर्कल के "अपने आदमी" बन बैठे।
जब एली को उप-रक्षामंत्री बनाने की बात चली
इसके बाद 1963 में प्रतिबंधित बाथ पार्टी के दिन बदले और उन्होंने सीरिया की सत्ता पलट दी। इससे एली कोहेन का गेम पूरी तरह से बदल गया। अब वह बाथ पार्टी के नेताओं और फौजी अफसरों की दोस्ती के चलते सीरिया की राजधानी दमिश्क में सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक बन गए थे। उनका घर दमिश्क के उस पॉश इलाके में था जहां से फौज और सरकार की हर एक्टिविटी पर सीधी नजर रखी जा सकती थी। एली कोहेन की पहुंच तब इतनी बढ़ गई थी कि सियासी गलियारों में उन्हें सीरिया का डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर यानी उप-रक्षामंत्री बनाने की चर्चा तक होने लगी थी। 1961 से 1965 के दौरान एली ने इजरायल को ऐसी-ऐसी खुफिया जानकारियां दीं जिसने मिडिल-ईस्ट की किस्मत बदल दी।
एली कोहेन का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक
एली कोहेन ने यहां सीरियाई आर्टिलरी की सटीक लोकेशन जानी, वहां की तस्वीरें लीं और एक अविश्वसनीय चाल चल दी। उन्होंने फौजी अफसरों को मनाकर सैनिक ठिकानों पर पेड़ लगवा दिए। ये पेड़ यूकेलिप्टस के थे जो बाकी पेड़ों के मुकाबले जल्दी बड़े हो जाते हैं। तब एली ने सीरियाई अफसरों को यह कहकर मनाया था कि जवान इतनी गर्मी में धूप में तैनात रहते हैं, पेड़ के जरिए मैं उन्हें छांव देना चाहता हूं जिससे कि वह आसानी से अपना काम कर सकें। लेकिन असल में एली के लगवाए गए ये पेड़ इजरायल के लिए लोकेशन मार्कर बने। 1967 की Six Days War में इन्हीं पेड़ों ने गोलन हाइट्स पर इजरायल को निर्णायक बढ़त दिलाई। इजरायल की वायुसेना ने चुन-चुनकर पेड़ वाली जगहों पर बम गिराए और सीरियाई सेना के पोस्ट को तबाह कर डाला।
आखिर कैसे पकड़े गए एली कोहेन?
लेकिन फिर आया 1965... एक सीक्रेट मैसेज भेजते वक्त सीरियाई काउंटर-इंटेलिजेंस ने एली कोहेन को ट्रेस कर लिया। वह पकड़े गए। फिर उनके खिलाफ सीरिया में मुकदमा चला, उन्हें बुरी तरह से टॉर्चर किया गया। इसके बाद दमिश्क के एक चौराहे पर सबके सामने एली कोहेन को फांसी पर लटका दिया गया। एली कोहेन एक आम मौत नहीं मरे, बल्कि एक नायक की तरह इस दुनिया से विदा हुए।
एली कोहेन, सिर्फ एक स्पाई नहीं थे, वह इजरायल की सिक्योरिटी, इंटेलिजेंस और बहादुरी का सबसे चमकता सितारा थे। ये गाथा है उस द ग्रेटेस्ट स्पाई की, जिसने सीरिया की सरकार में सेंध लगाकर पूरे विश्व की जियोपॉलिटिक्स बदल दी।