वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आखिरकार व्हाइट हाउस में अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच शांति समझौता कराने में सफल रहे। अज़रबैजान और आर्मीनिया के नेताओं ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर ट्रंप की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए। अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ यह समझौता दक्षिण कॉकस क्षेत्र में चार दशकों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करता है। ट्रंप ने दोनों देशों के नेताओं का हैंडशेक कराकर यह समझौता कराया।
खत्म होगा 40 साल पुराना संघर्ष
अजरबैजान और आर्मीनिया के बीच करीब 40 साल से संघर्ष चल रहा था। अब उम्मीद है कि यह युद्ध खत्म होगा। इस समझौते में दोनों देशों के बीच प्रमुख परिवहन मार्गों को फिर से खोलने का प्रावधान है। इसके साथ ही अमेरिका को इस क्षेत्र में रूस के घटते प्रभाव का लाभ उठाने का अवसर भी मिलेगा। व्हाइट हाउस ने बताया कि इस समझौते के तहत एक नया ट्रांज़िट कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसका नाम होगा "ट्रंप रूट फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रॉस्पेरिटी" (अंतरराष्ट्रीय शांति और समृद्धि के लिए ट्रंप मार्ग)।
ट्रंप हुए गौरवान्वित
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मार्ग का नाम अपने नाम पर रखे जाने को "एक बहुत बड़ा सम्मान" बताया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा, "मैंने इसके लिए कोई मांग नहीं की थी।" एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यह नाम रखने का सुझाव आर्मीनिया की ओर से आया था। संयुक्त समझौते के अतिरिक्त दोनों देशों ने अमेरिका के साथ अलग-अलग समझौते भी किए हैं, जिनका उद्देश्य ऊर्जा, तकनीक और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि इन समझौतों के विस्तृत ब्योरे अभी जारी नहीं किए गए हैं।
क्यों शुरू हुआ था संघर्ष
करीब 40 वर्षों से दोनों देशों के बीच नागोर्नो-कराबाख क्षेत्र को लेकर यह संघर्ष चल रहा था। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय रूप से अज़रबैजान का हिस्सा माना जाता है, लेकिन सोवियत काल में यहां अधिकतर आर्मीनियाई लोग रहते थे। इस विवाद ने दशकों में हजारों लोगों की जान ली, जबकि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रयास विफल रहे। हाल ही में, 2023 में अज़रबैजान ने कराबाख पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया था और उसके बाद से दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने की बातचीत जारी थी।
ट्रंप की कूटनीतिक उपलब्धि
समारोह के दौरान अज़रबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव और आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनियन ने हाथ मिलाकर इस ऐतिहासिक पल को चिह्नित किया। ट्रंप बीच में खड़े थे, जिन्होंने दोनों नेताओं के हाथ अपने हाथों में लेकर एकता का संदेश दिया। ट्रंप अपनी छवि शांति दूत के रूप में बनाना चाहते हैं। वह इससे पहले भी कई शांति और आर्थिक समझौतों की मध्यस्थता कर चुके हैं। शुक्रवार को हुआ यह समझौता उनके लिए एक और बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप चाह रहे शांति का नोबेल पुरस्कार
दोनों देशों के नेताओं ने कहा कि यह सफलता ट्रंप और उनकी टीम के कारण संभव हो सकी है। कई विदेशी नेताओं की तरह उन्होंने भी ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग की। आर्मीनिया के प्रधानमंत्री पशिनियन ने समझौते को "एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर" बताते हुए कहा, "हम आज एक बेहतर भविष्य की नींव रख रहे हैं।" राष्ट्रपति अलीयेव ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने छह महीनों में चमत्कार कर दिया।" ट्रंप ने कहा, "पैंतीस साल तक वे लड़े, और अब वे दोस्त हैं...और लंबे समय तक दोस्त बने रहेंगे।"
ट्रंप रूट कहां बनेगा
ट्रंप रूट अज़रबैजान और उसके स्वायत्त नक्चेवान क्षेत्र को जोड़ेगा, जो आर्मीनिया की 32 किमी (20 मील) चौड़ी पट्टी से अलग है। इसी मार्ग को लेकर अज़रबैजान की मांगें पहले शांति वार्ता में अड़चन बनी हुई थीं। तेल और गैस का प्रमुख उत्पादक देश अज़रबैजान इस रूट से तुर्की और आगे यूरोप तक सीधा संपर्क बना सकेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इस मार्ग का दौरा करना चाहेंगे: “हमें वहां जाना होगा।” जब उनसे पूछा गया कि क्या वे आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच स्थायी शांति को लेकर आश्वस्त हैं, तो ट्रंप ने कहा, "पूरी तरह से।"
रूस के लिए झटका
पूर्व सोवियत गणराज्य रहे आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच हुए इस समझौते को रूस के लिए एक भू-राजनीतिक झटका माना जा रहा है। रूस ने वर्षों तक इस क्षेत्र में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अपना प्रभाव बनाए रखा था, लेकिन फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण हमले के बाद उसकी पकड़ कमजोर हो गई। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने इस वर्ष की शुरुआत में इस दिशा में सक्रियता दिखाई, जब उनके प्रमुख राजनयिक प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ़ ने बाकू में अलीयेव से मुलाकात की और तथाकथित "क्षेत्रीय पुनर्संयोजन" की शुरुआत की।
'ट्रंप रूट' के निर्माण को लेकर बातचीत अगले सप्ताह शुरू होने की संभावना है, जिसमें रेल लाइन, तेल व गैस पाइपलाइन, और फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क शामिल होंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अब तक कम से कम नौ डेवलपर्स इस परियोजना में रुचि दिखा चुके हैं।