जहानाबाद: बिहार विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर 2025 को होगा और 14 नवंबर को चुनाव के नतीजे आएंगे। जहानाबाद जिले की सभी सीटों पर राजनीतिक दल चुनावी कार्यक्रम कर रहे हैं। घोसी निर्वाचन क्षेत्र में भी संभावित उम्मीदवार जनता के बीच जा रहे हैं। घोसी सीट पर इस समय महागठबंधन का कब्जा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन) के राम बली सिंह यादव यहां से विधायक हैं। इस बार यहां पर चुनावी मुकाबला कड़ा देखने को मिल सकता है।
घोसी के बारे में जानिए
घोसी निर्वाचन क्षेत्र जहानाबाद जिले के अंतर्गत आता है। यह इलाका मगध क्षेत्र की कृषि और सांस्कृतिक परंपराओं से प्रभावित रहा है। यहां के मतदाता पार्टियों के बजाय उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं। घोसी में अनुसूचित जाति की अच्छी-खासी आबादी है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 20 प्रतिशत है। मुस्लिम मतदाता करीब पांच प्रतिशत हैं।
घोसी सीट का चुनावी इतिहास
घोसी सीट पर हुए अब तक चुनाव में कांग्रेस ने पांच बार, निर्दलीय ने चार बार, जेडीयू ने तीन बार, भाकपा ने दो बार और जनता पार्टी, भाजपा और भाकपा (माले) (एल) ने एक-एक बार जीत हासिल की है। भाकपा (माले) (एल) ने 2020 में आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन के हिस्से के रूप में 17,333 मतों के अंतर से यह सीट जीती थी।
घोसी में 2010 और 2015 में जेडीयू को जीत मिली थी। 2000 और 2005 में यहां से आरजेडी को जीत हासिल हुई थी। 1995 में जनता दल, 1990 में जनता पार्टी को जीत मिली थी। 1980 और 1985 में कांग्रेस को जीत मिली थी। 1997 में जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी।
घोसी में इस बार क्यों होगा कड़ा मुकाबला
घोसी सीट पर इस बार चुनावी मुकाबला कड़ा हो सकता है। महागठबंधन की तरफ से भाकपा (माले) (एल) तो एनडीए की तरफ से जेडीयू उम्मीदवार उतार सकती है। वहीं, प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज पहली बार चुनाव लड़ रही है। वहीं निर्दलीय भी मुकाबले को रोचक बना सकते हैं। इस बार चिराग पासवान की पार्टी भी एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। चूंकि यहां पर दलित मतदाताओं की काफी संख्या है। इसलिए इस बार महागठबंधन की राह यहां पर आसान नहीं होगी।