अरवलः बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही राज्य में चुनावी शोर देखा जा रहा है। सभी राजनीतिक दलों की तरफ से बयानबाजी हो रही है। अरवल जिले की कुर्था विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल गरम है। इस सीट पर अभी आरजेडी का कब्जा है। इस बार यहां पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। बिहार विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर 2025 को होगा और 14 नवंबर को चुनाव के नतीजे आएंगे।
कुर्था के बारे में जानिए
कुर्था कभी नक्सल प्रभावित इलाका था। अब यह इलाका कभी बदल चुका है। 2019 के बाद से यहां पर कोई बड़ी नक्सली घटना नहीं हुई है। प्राचीन काल में कुर्था मगध साम्राज्य का हिस्सा था। कुर्था में कुशवाहा, यादव और भूमिहार मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। यह सामान्य श्रेणी की सीट है। यह पूरी तरह से ग्रामीण इलाका है।
कुर्था सीट का चुनावी इतिहास
कुर्था विधानसभा सीट बनने के बाद से 17 बार चुनाव हुए हैं। इस सीट पर कांग्रेस, आरजेडी, जेडीयू और एलजेपी दो-दो बार जीत दर्ज कर चुकी है। समाजवादी विचारधारा का दावा करने वाली पार्टियां करीब पांच बार चुनाव जीत चुकी हैं। 2020 में आरजेडी के बागी कुमार वर्मा ने जेडीयू के दो बार के विधायक सत्यदेव सिंह को 27,810 मतों के भारी अंतर से हराकर यह सीट जीत ली। लोकसभा चुनाव में आरजेडी इस विधानसभा से बढ़त हासिल की थी।
साल 2010 और 2015 में जेडीयू ने लगातार दो बार यह सीट जीती थी। 2005 में एलजेपी को जीत मिली थी। 2000 में आरजेडी ने विजय हासिल की थी। 1990, 1995 में जनता दल ने जीत दर्ज की थी। 1985 में निर्दलीय को जीत मिली थी। 1980 में JNP(SC) और 1977 में SSD को जीत मिली थी। 1972 में कांग्रेस ने यह सीट जीती थी।
क्यों कड़ा होगा मुकाबला
कुर्था में इस बार चुनावी मुकाबला काफी रोचक होने वाला है। यहां से आरजेडी अपना उतार सकती है तो एनडीए की तरफ से जेडीयू और एलजेपी की दावेदारी हो सकती है। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी पहली बार चुनाव लड़ रही है। निर्दलीय और बागी भी मुकाबले को रोचक बना सकते हैं।