बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो रही हैं। बिहार की खास सीटों की बात करें तो बिक्रम विधानसभा क्षेत्र इनमें से एक है। यह सीट पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां महागठबंधन और एनडीए के बीच कांटे की टक्कर की उम्मीद है।
ग्रामीण इलाके में फैली है ये सीट
बिक्रम विधानसभा सीट पटना जिले के ग्रामीण इलाके में फैली हुई है। यह सीट तारानगर, कौड़िया, यमुनापुर, बिंदौल, मच्छलपुर लाई, कुंजवा, सैदाबाद, वजीरपुर, नागहर जैसे ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
मीसा भारती ने बीजेपी के राम कृपाल यादव को हराया था
2024 के लोकसभा चुनाव में पाटलिपुत्र सीट पर आरजेडी की मीसा भारती ने भाजपा के राम कृपाल यादव को 85,174 वोटों से हराया था, जो बिक्रम के मतदाताओं की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
यादव वोटर का है बोलबाला
बिक्रम में जातिगत समीकरण हमेशा से चुनावी रणनीति का केंद्र रहे हैं। यहां यादव समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है, जो कुल वोटों का लगभग 20-25 प्रतिशत है और महागठबंधन (खासकर RJD) का मजबूत आधार है। इसके अलावा, कुशवाहा (कोएरी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो एनडीए (JDU-BJP) की लव-कुश समीकरण रणनीति का हिस्सा हैं।
2020 और 2010 में कांग्रेस ने दर्ज की जीत
पिछले तीन विधानसभा चुनावों में बिक्रम सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिली है। यहां कांग्रेस ने लगातार दो बार जीत हासिल की, लेकिन 2010 के विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा ने कम मार्जिन से जीत दर्ज की थी।
2010 में बीजेपी के उम्मीदवार की हुई थी जीत
2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार सिद्धार्थ सौरव ने निर्दलीय उम्मीदवार अनिल कुमार को 19.82 प्रतिशत मार्जिन से हराया था, जो महागठबंधन की मजबूती को दिखाता है। 2015 में भी कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन 2010 में भाजपा के उम्मीदवार अनिल कुमार ने लोजपा को करीबी मुकाबले में मात दी थी।