बिहार में अगले कुछ महीनों में विधानसभा के चुनाव हैं। दानापुर विधानसभा सीट बिहार की राजनीति में एक रणनीतिक महत्व रखती है। पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सामान्य सीट है। यह सीट पटना शहर से सटा उपनगर है, जहां रेलवे जंक्शन और सैन्य स्टेशन भी है।
यादव और राय RJD का मजबूत आधार
बिहार में चुनावी मैदान में जातिगत समीकरण ही असली खेल बदलते हैं। यादव और राय जैसे OBC समुदायों का मजबूत आधार है, जो कि RJD को फायदा पहुंचाता रहा है। BJP ऊपरी जातियों और SC वोटों पर निर्भर रहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरीकरण के बावजूद जाति की ध्रुवीकरण यहां हार-जीत तय करता है।
जानिए इस सीट का जातिगत समीकरण
दानापुर विधानसभा सीट में यादव समुदाय (OBC) का अनुमानित 20-25 प्रतिशत हिस्सा RJD का कोर वोटबैंक है, जबकि राय (भूमिहार उपसमूह) भी प्रभावी हैं। SC आबादी (12.35%) किंगमेकर साबित होती है, जो NDA या महागठबंधन की ओर झुकाव रखती है। अन्य OBC जैसे कुशवाहा और कोइरी 15-20 प्रतिशत के साथ संतुलन बनाते हैं, जबकि मुस्लिम वोटर (10-12%) अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करते हैं। ऊपरी जातियों (भूमिहार, राजपूत) की संख्या सीमित है। ये जातियां BJP के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं।
2 बार बीजेपी 1 बार RJD की जीत
पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2010, 2015, 2020) में दानापुर में BJP और RJD के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली। 2010 और 2015 में BJP की आशा देवी सिन्हा ने जीत हासिल की, लेकिन 2020 में RJD के रीतलाल यादव ने यादव वोटों के दम पर जीत दर्ज की।
रीतलाल यादव ने आशा देवी को हराया
साल 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के उम्मीदवार रीतलाल यादव को 89,895 वोट मिले। रीतलाल यादव ने बीजेपी की उम्मीदवार आशा देवी को 15924 वोटों से हराया था।
आशा देवी सिन्हा ने दर्ज की जीत
2015 के विधानसभा चुनाव में दानापुर विधानसभा सीट से आशा देवी सिन्हा ने जीत दर्ज की थी। आशा सिन्हा को 72,192 वोट मिले थे। आरजेडी के उम्मीदवार राज किशोर यादव को 66,983 वोट मिले थे।
आशा सिन्हा ने रीतलाल यादव को हराया
2010 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से बीजेपी की उम्मीदवार आशा देवी सिन्हा ने जीत दर्ज की थी। बीजेपी की उम्मीदवार ने निर्दलीय उम्मीदवार रीतलाल यादव को 17,919 वोटों से हराया था।