बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। बिहार की खास सीटों की बात करें तो मनेर विधानसभा क्षेत्र इनमें से एक है। पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र में आने वाली यह एक सामान्य श्रेणी की सीट है। इस सीट पर आरजेडी और बीजेपी के बीच लड़ाई देखने को मिलता है।
यादवों की मजबूत पकड़ से RJD को मिलता है फायदा
मनेर विधानसभा सीट कृषि-प्रधान है। इसके चलते यहां बाढ़, बेरोजगारी और सड़क सुविधाओं की कमी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। 1951 से बनी इस सीट पर कांग्रेस ने 7 बार, RJD ने 5 बार लगातार जीत हासिल की है। इस सीट पर चुनावी दांव-पेंच जातिगत समीकरण तय करते हैं, जहां यादवों की मजबूत पकड़ RJD को फायदा पहुंचाती है।
जानिए जातिगत समीकरण
मनेर में यादव समुदाय का अनुमानित 26 प्रतिशत हिस्सा RJD का कोर सपोर्ट बेस है, जो 1951 से ही सीट पर दबदबा जमाए हुए है। SC मतदाता (13.48%) किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं, जो महागठबंधन या NDA की ओर झुकाव रखते हैं। अन्य OBC जैसे कुशवाहा और कोइरी 15-20 प्रतिशत के साथ संतुलन बनाते हैं, जबकि मुस्लिम वोट (5.1%) अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करते हैं। ऊपरी जातियां (भूमिहार, राजपूत) सीमित हैं, लेकिन BJP के लिए महत्वपूर्ण। विशेषज्ञों के अनुसार, यादव-SC गठजोड़ RJD को मजबूत बनाता है।
यादव वोटबैंक के दम से जीत रहे वीरेंद्र यादव
पिछले तीन बार के विधानसभा चुनावों (2010, 2015, 2020) में RJD के भाई वीरेंद्र ने लगातार कमान संभाली है। यादव वोटबैंक के दम पर इन्होंने जीत दर्ज की है। 2020 के विधानसभा चुनाव में मनेर सीट से आरजेडी के उम्मीदवार भाई वीरेंद्र यादव ने जीत दर्ज की है। वीरेंद्र यादव ने भाजपा के उम्मीदवार निखिल आनंद को हराया था। तीसरे नंबर पर इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार श्रीकांत निराला रहे थे।
वीरेंद्र यादव ने श्रीकांत निराला को हराया
2015 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट से आरजेडी के उम्मीदवार भाई वीरेंद्र यादव ने जीत दर्ज की थी। भाई वीरेंद्र ने बीजेपी के उम्मीदवार श्रीकांत निराला को 22828 वोटों से हराया था।
2010 में भी जीता RJD का उम्मीदवार
2010 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से आरजेडी के उम्मीदवार ने ही जीत दर्ज की थी। आरजेडी उम्मीदवार भाई वीरेंद्र यादव ने जेडीयू के उम्मीदवार श्रीकांत निराला को हराया था। आरजेडी के उम्मीदवार भाई वीरेंद्र को 57,818 वोट मिले थे।