बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मियां तेज हैं। बिहार की खास सीटों की बात करें तो मसौढ़ी विधानसभा क्षेत्र इनमें से एक है। पटना जिले के दक्षिणी छोर पर मसौढ़ी विधानसभा सीट बसी हुई है। ये विधानसभा सीट पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। मसौढ़ी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।
2008 में इस सीट को किया गया आरक्षित
1957 से अस्तित्व में आई इस सीट को 2008 में SC आरक्षित किया गया है। इस सीट में RJD, JDU, BJP और कांग्रेस के उम्मीदवार मुख्यरूप से चुनाव लड़ते आ रहे हैं। अब तो महागठबंधन और एनडीए के बीच चुनावी लड़ाई चल रही है।
जानिए जातीय समीकरण
मसौढ़ी विधानसभा सीट में दलित वोटों का ध्रुवीकरण चुनावी समीकरण तय करता है। इस सीट में SC मतदाता (22.14%) RJD का कोर बेस है। पासवान, चमार और रविदास जैसे SC समूह महागठबंधन को मजबूत बनाते हैं। यादव (OBC) का 15-20% हिस्सा RJD को फायदा पहुंचाता है, जबकि कुशवाहा-कोइरी (15%) NDA की ओर झुकाव रखते हैं। मुस्लिम वोटर (4.2%) अल्पसंख्यक समीकरण को संतुलित करते हैं। ऊपरी जातियां (भूमिहार, राजपूत) सीमित (5-8%) हैं, जो BJP का सीमित समर्थन देती हैं।
दो बार RJD और एक बार JDU ने दर्ज की जीत
पिछले तीन बार के विधानसभा चुनावों (2010, 2015, 2020) में दो बार RJD ने और एक बार जेडीयू के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। 2020 के विधानसभा चुनाव में मसौढ़ी विधानसभा सीट से आरजेडी की उम्मीदवार रेखा देवी ने जीत दर्ज की है। आरजेडी की उम्मीदवार ने जेडीयू की नूतन पासवान को हराया था।
2015 में RJD उम्मीदवार की जीत
2015 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से भी आरजेडी की उम्मीदवार रेखा देवी ने जीत दर्ज की थी। रेखा देवी को 89,657 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर इस सीट से हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) की नूतन पासवान रहीं थी। नूतन पासवान को 50,471 वोट मिले थे।
2010 में जेडीयू से अरुण मांझी जीते चुनाव
2010 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से जेडीयू के उम्मीदवार अरुण मांझी ने जीत दर्ज की थी। अरुण मांझी ने लोजपा के उम्मीदवार अनिल कुमार को हराया था। जेडीयू उम्मीदवार को 56977 वोट मिले थे। लोजपा उम्मीदवार को 51945 वोट मिले थे।