बिहार में अगले कुछ महीनों में विधानसभा के चुनाव हैं। सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी जनसभाएं और बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। ऐसे में एक बार फिर चर्चा होने लगी है कि बिहार में इस बार विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा? भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि इस बात के पर्याप्त संकेत हैं कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव बिहार में इंडिया ब्लॉक की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है।
राहुल गांधी अगले प्रधानमंत्री के उम्मीदवार
सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में राजद नेता द्वारा स्पष्ट रूप से राहुल गांधी को ‘अगला प्रधानमंत्री’ उम्मीदवार बनाने की वकालत किए जाने के बावजूद, गांधी की ओर से तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने में उदासीन रवैये को लेकर किए गए सवाल के जवाब में भट्टाचार्य ने यह टिप्पणी की।

अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं
भाकपा (माले) लिबरेशन नेता ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘समझदार लोग इशारों को समझ सकते हैं। अभी कल आपने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को अगल-बगल मोटरसाइकिल चलाते देखा। भले ही ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर से अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन समय-समय पर कई संकेत मिलते रहे हैं।’
राहुल गांधी ने टाल दिया था सवाल
रविवार को अररिया जिले में एक संवाददाता सम्मेलन में गांधी ने इस सवाल को टाल दिया था कि क्या बिहार के विधानसभा चुनावों में यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने पर सहमति बन गई है? इस पर बीजेपी के रविशंकर प्रसाद जैसे एनडीए के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया था कि राजद और कांग्रेस के बीच विश्वास की कमी है, जो चुनावों में ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए नुकसानदेह साबित होगी।
पर्दे के पीछे चल रहा कोई और खेल
भट्टाचार्य ने दावा किया, ‘इंडिया गठबंधन में इस बात को लेकर पूरी स्पष्टता है कि अगर वह सत्ता में आता है तो मुख्यमंत्री कौन होगा। दूसरी ओर राजग में भी यह साफ है कि फिलहाल (मुख्यमंत्री) नीतीश कुमार को पेश किया जा रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे कोई और खेल चल रहा है।’
बीजेपी को अभी नहीं मिला सीएम चेहरा
विधानसभा की 243 सीट में से कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) के पास 50 से भी कम सीट हैं। सीट की संख्या के हिसाब से बेहतर भाजपा को अभी तक राज्य में अपना मुख्यमंत्री चेहरा नहीं मिला है। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक भट्टाचार्य ने मांग की कि निर्वाचन आयोग मसौदा सूची में गलत तरीके से नाम हटाए जाने के संबंध में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की ‘31 अगस्त की समयसीमा बढ़ाए।’
चुनाव में SIR का भी मुद्दा
उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं उनमें से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर हैं। उन्हें और समय मिलना चाहिए। इसके अलावा निर्वाचन आयोग हमारे द्वारा नामित 1,000 से अधिक बूथ-स्तरीय एजेंटों को मंजूरी देने में आनाकानी कर रहा है उसे जल्द कदम उठाना चाहिए।’ (भाषा के इनपुट के साथ)