बिहार के गया जिले के एएनएमएमसीएच अस्पताल एक बार फिर अपनी लापरवाही को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के इलाज से जुड़ा है, जिसने अस्पताल प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, जहर खाकर अस्पताल पहुंची एक महिला का इलाज डॉक्टरों या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ के बजाय वार्ड बॉय करते नजर आ रहे है। इलाज के दौरान महिला को उल्टी भी होती है। अस्पताल अधीक्षक से पूछने पर यह पता चला कि उन्हें इस बारे में जानकारी ही नहीं है। इसी से अस्पताल की लचर व्यवस्था का साफ पता चलता है
इमरजेंसी में डॉक्टर की जगह वार्ड बॉय ने किया इलाज शुरू
वजीरगंज क्षेत्र की एक महिला को जहर खाने के बाद परिजन आनन-फानन में इलाज के लिए एएनएमएमसीएच अस्पताल लेकर पहुंचे थे। इमरजेंसी में डॉक्टर की जगह वार्ड बॉय हीं इमरजेंसी गेट के बाहर महिला मरीज का इलाज करते दिख रहे है। महिला की हालत गंभीर थी और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी। लेकिन इलाज की जिम्मेदारी डॉक्टर या नर्स की बजाय कथित तौर पर वार्ड बॉय संभालते दिखे।
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अस्पताल अधीक्षक ने कहा हमे जानकारी नहीं
इस मामले को लेकर जब अस्पताल अधीक्षक डॉ. एपी आनंद से पूछा गया तो तो उन्होंने कहा, "हमें इस घटना की जानकारी नहीं है। वार्ड बॉय के इलाज करने पर अचंभित होकर कहा अगर ऐसा हुआ है तो तुरंत दिखवाते है।
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परिजनों ने कुछ भी कहने से किया इनकार
वहीं महिला मरीज के परिजन से कई बार पूछा गया कि कैसे घटना हुई लेकिन वह कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। वहीं वार्ड बॉय महिला के नाक में पाइप डालकर दवा डालते दिखा जिस पर महिला उल्टी कर रही थी।
ऐसी व्यवस्था ANMMCH की स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता हैं। यदि डॉक्टरों की मौजूदगी में भी गैर-चिकित्सकीय कर्मी मरीजों का इलाज कर रहे हैं, तो यह मरीजों की जान के साथ गंभीर खिलवाड़ है। इस घटना ने अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा, इलाज की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
(गया से अजित कुमार की रिपोर्ट)
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