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कैबिनेट का बड़ा फैसला, शुगर सेक्टर को 6000 करोड़ का राहत पैकेज

 Written By: India TV Business Desk
 Published : Jun 10, 2015 03:37 pm IST,  Updated : Jun 10, 2015 04:06 pm IST

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट ने कई बड़े फैसले लिए। इसमें गन्ना किसानो के बकाए से दिक्कत में फंसी चीनी मिलों को राहत देने के लिए सरकार ने 6000 करोड़

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कैबिनेट का बड़ा फैसला, शुगर सेक्टर को 6000 करोड़ का राहत पैकेज

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट ने कई बड़े फैसले लिए। इसमें गन्ना किसानो के बकाए से दिक्कत में फंसी चीनी मिलों को राहत देने के लिए सरकार ने 6000 करोड़ रुपए ब्याज मुक्त कर्ज को मंजूरी दी। साथ ही देश में यूरिया की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मंत्रिमंडल ने नाफ्था आधारित तीन यूरिया संयंत्रों में उत्पादन जारी रखने का फैसला लिया है।

कैबिनेट ने अन्य फैसलों में बांग्‍लादेश, नेपाल व भूटान के साथ मोटर व्‍हीकल करार और चेक बाउंस के मामलों के जल्‍द निपटने के लिए अध्‍यादेश को मंजूरी दे दी है।

चीनी मिलों के लिए 6,000 करोड़ रुपए का कर्ज

सरकार ने चीनी मिलों के लिए 6,000 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त कर्ज आज मंजूर किया ताकि उनके लिए किसानों को गन्ने का कुछ बकाया चुकाने में आसानी हो सके। मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया करीब 21,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की आज यहां हुई बैठक में यह निर्णय किया गया। इससे सरकारी खजाने पर करीब 600 करोड़ रुपए का बोझ आएगा। 

सड़क परिवहन राजमार्ग और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा,  चीनी मिलें अधिक उत्पादन एवं कम कीमत की वजह से किसानों को भुगतान नहीं कर पा रही हैं। गन्ना किसानों का बकाया 21,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने यह निर्णय भी किया कि कर्ज उन्हीं इकाइयों को उपलब्ध कराया जाएगा जो 30 जून, 2015 से पहले बकाए का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान कर देती हैं। यह दूसरी बार है जब केंद्र नकदी संकट से जूझ रही चीनी मिलों को ब्याज मुक्त रिण उपलब्ध करा रहा है। दिसंबर, 2013 में संप्रग सरकार ने गन्नों किसानों के बकाए का भुगतान करने के लिए 6,600 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त कर्ज दिया था।

 

गडकरी ने कहा कि केंद्र ने पहले ही कई उपाय किए हैं जिसमें चीनी का आयात शुल्क बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाना, कच्ची चीनी पर 4,000 रपये प्रति टन की निर्यात सब्सिडी और पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को प्रोत्साहन हेतु एथनॉल की कीमतों में वृद्धि शामिल है।
उन्होंने कहा,  यह निर्णय उद्योग को सहयोग देने के लिए नहीं, बल्कि किसानों के हितों को ध्यान में रखकर किया गया है।
भारत का चीनी उत्पादन 2014-15 विपणन वर्ष :अक्तूबर-सितंबर: में 2.8 करोड़ टन का स्तर पार कर जाने का अनुमान है जो इससे पिछले वर्ष में 2.43 करोड़ टन था।

नाफ्था आधारित तीन यूरिया संयंत्रों को उत्पादन जारी रखने की मंजूरी दी

दक्षिणी राज्यों में यूरिया की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नाफ्था को कच्चेमाल के रूप में इस्तेमाल कर यूरिया बनाने वाले तीन संयंत्रों को पाइपलाइन या किसी अन्य माध्यम से गैस उपलब्ध होने तक यूरिया उत्पादन जारी रखने की आज मंजूरी दी।

उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने यहां संवाददाताओं को बताया,  आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति :सीसीईए: ने मद्रास फर्टिलाइजर्स :एमएफएल:, मंगलोर केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स :एमसीएफएल: और सदर्न पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्रीज कारपोरेशन :एसपीआईसी: से नाफ्था का उपयोग कर यूरिया का उत्पादन जारी रखने को आज मंजूरी प्रदान की। उन्होंने कहा,  दक्षिणी राज्यों में उर्वरक की निर्बाध रूप से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय किया गया है। कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल की कुल जरूरत 23 लाख टन की है और इन तीन संयंत्रों का सालाना यूरिया उत्पादन 15 लाख टन है। संशोधित नई मूल्य निर्धारण योजना: एनपीएस:-3 के तहत एमएफएल-मनाली, मसीएफएल-मंगलोर और एसपीआईसी-तूतिकोरिन को पिछले साल 30 जून तक नाफ्था का उपयोग कर यूरिया का उत्पादन करने की अनुमति दी गई थी जिसे मंत्रिमंडल की ओर से बाद में दो बार समय विस्तार दिया गया।

चार दक्षेस देशों के मोटर वाहन करार को मंत्रिमंडल की मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और दक्षेस के तीन अन्य देशें भूटान, बांग्लादेश व नेपाल के बीच 15 जून को होने वाले मोटर वाहन करार पर दस्तखत की अनुमति दे दी है। इससे इन देशों के बीच यात्रियों व मालढुलाई वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी। इस मंजूरी के बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भूटान जाएंगे जहां संबंधित देशो के परिवहन मंत्रियों को करार पर दस्तखत करना है। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद एक आधिकारिक बयान मों कहा गया है, मंत्रिमंडल ने बांग्लादेश, भूटान, भारत व नेपाल : बीबीआईएल: मोटर वाहन करार को मंजूरी दे दी है। यह यात्रियों, निजी व कार्गो वाहनों यातायात का नियमन करेगा। करार पर बीबीआईएन के परिवहन मंत्री भूटान, थिम्पू में 15 जून को दस्तखत करेंगे।

इस में कहा गया है कि बीबीआईएन करार से उप क्षेत्र में सुरक्षित, आर्थिक दृष्टि से दक्ष तथा पर्यावरणनुकूल मजबूत सड़क परिवहन को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे प्रत्येक देश को क्षेत्रीय एकीकरण के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। बयान में कहा गया है, बीबीआईएन देश यात्रियें व वस्तओं के आपसी सहमति वाली सीमापार आवाजाही से लाभान्वित होंगे जिससे क्षेत्र का कुल आर्थिक विकास हो सकेगा। यात्रियों और सामान की बेरोकटोक आवाजाही से चारों देशों के लोगों को लाभ होगा। बयान में कहा गया है कि इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक पक्ष लागत का बोझ खुद उठाएगा।

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