पेरिस आतंकी हमले का ख़ामियाज़ा एक आम मुसलमान को भी उठाना पड़ रहा है। एक अमेरिकी मुस्लिम महिला ने दावा किया है उसके घर्म की वजह से उसे विमान से उतारकर घंटों पूछताछ की गई। वह न्यू जर्सी से इस्तानबुल जा रही थी।
30 साल की कमलीहा रशीद से अमेरिकी अधिकारियों ने मंगलवार को न्यूआर्क लिबर्टी इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर दो गंटे से ज़्यादा पूछताछ की। रशीद का कहना है उसे जानबूझकर 'बेइज़्ज़त' किया गया।
राशीद स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की ग्रेजुएट है और द न्यू इंक्वारी अख़बार में लिखती भी हैं। उन्होंने इस घटना को इस्लामोफ़ोबिया बताया।
डेली मेल के अनुसार रशीद ने कहा कि विमान में 200 यात्री थे लेकिन सिर्फ वो ही एक ऐसी यात्री थी जो मुसलमान दिख रही थी। उन्हें इसके पहले सिक्यूरिटी चैक और पूछताछ के बाद विमान में बैठने दिया गया था लेकिन विमान के उड़ान भरने के पहले उन्हें जबरदस्ती उतार दिया गया और फिर एफबीआई ने पूछताछ की।
रशीद ने कहा, 'मुझे लगता है ये इसलिये हुआ क्योंकि मैं मुसलमान हूं, क्योंकि मैं इस्तानबुल जा रही थी, क्योंकि उनके पास अनियंत्रित अधिकार हैं, क्योंकि सिक्यूरिटी का मतलब है अधिकारों का हनन।
रशीद ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पेरिस हमले के बाद इस्लामोबोफ़ोबिया फिर वापस आ गया है। दरअसल ये कभी गया ही नहीं था, अब इसे कानूनी जामा मिल गया है
उन्होंने कहा 9/11 के बाद आपने मुसलमानों के ख़िलाफ़ जो चाहा किया और किसी ने कुछ नहीं कहा और अब पेरिस हमले के बाद ऐसा हो गया है कि 'देखो उन्होंने क्या कर दिया, अब मैं जैसा चाहूं उनसे बर्ताव कर सकता हूं।'
पिछले हफ़्ते मिडिल ईस्ट में रहने वाले चार यात्रियों को संदिग्ध गतिविधियों की वजह से बाल्टीमोर-वाशिंग्टन इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर उतार दिया गया था। बाद में पता चला कि उनमे से एक व्यक्ति अपने फ़ोन पर टीवी देख रहा था।