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जनसांख्यिकीय बदलाव, धर्मांतरण, घुसपैठ और अवैध प्रवासियों पर बोले उपराष्ट्रपति, जताई चिंता

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jan 22, 2025 08:08 am IST,  Updated : Jan 22, 2025 08:08 am IST

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने प्रलोभन के माध्यम से नैसर्गिक जनसांख्यिकी को बदलने के प्रयासों के खिलाफ एकजुट प्रयासों का आह्वान किया।

जगदीप धनखड़- India TV Hindi
जगदीप धनखड़ Image Source : PTI

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को अपने एक बयान में "जनसांख्यिकीय बदलाव" को राष्ट्रवाद के लिए गंभीर खतरा बताया। इसे लेकर उन्होंने एकजुट प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने अवैध प्रवासन की समस्या पर भी चिंता जताई और कहा कि यह राष्ट्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने यह बात "बेहतर भारत के निर्माण के लिए विचार" विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान स्टूडेंट्स से की। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर, भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई के छात्र मौजूद थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद रहें।

"राष्ट्रवाद के लिए खतरे उभर रहे"

उपराष्ट्रपति ने कहा, "चिंता का एक गंभीर कारण है जिसका हमें एकजुट होकर समाधान करने की जरूरत है। जनसांख्यिकीय बदलाव के रूप में हमारे राष्ट्रवाद के लिए खतरे उभर रहे हैं। जनसांख्यिकीय बदलाव बहुत गंभीर है।" उन्होंने आरोप लगाया, "नैसर्गिक जनसांख्यिकीय विकास सुखदायक, सामंजस्यपूर्ण है, लेकिन अगर जनसांख्यिकीय विस्फोट केवल लोकतंत्र को अस्थिर करने के लिए होता है, तो यह चिंता का विषय है और हम प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरण का आयोजन कर रहे हैं।"

जगदीप धनखड़ ने कहा, "अपने लिए निर्णय लेना हर किसी का सर्वोच्च अधिकार है, लेकिन अगर वह निर्णय प्रलोभन द्वारा प्रेरित है और राष्ट्र की नैसर्गिक जनसांख्यिकी को बदलने की मंशा से है तो यह एक चिंता का विषय है, जिस पर हम सभी को ध्यान देना चाहिए और समाधान करना चाहिए।"

घुसपैठ के मुद्दे को उठाया 

इसके साथ ही उन्होंने घुसपैठ के मुद्दे को उठाया और देश में इसके प्रभाव को रेखांकित किया। धनखड़ ने कहा, "हम करोड़ों की आबादी वाले इस देश में घुसपैठ का सामना कर रहे हैं। अगर हम संख्या गिनें तो दिमाग चकरा जाता है। घुसपैठियों से निपटना होगा, लेकिन ऐसी स्थिति पैदा हुई है कि सांकेतिक प्रतिरोध भी नहीं होता। यह एक ऐसी समस्या है जिससे हमें निपटना होगा, क्योंकि इसने अप्रबंधनीय आयाम को हासिल कर लिया है।" धनखड़ ने कहा कि लाखों अवैध प्रवासी हमारे चुनावी तंत्र को अस्थिर करने की क्षमता रखते हैं, जहां लोग क्षुद्र राजनीतिक हित के बारे में सोचते हैं और उन्हें आसान समर्थक मिल जाते हैं। हमें हमेशा राष्ट्र को पहले रखना चाहिए और हमारे देश में एक अवैध प्रवासी का कोई औचित्य नहीं है।"

अवैध प्रवासियों की समस्या

उन्होंने कहा कि अगर यह लाखों में है, तो अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को देखें। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अवैध प्रवासी हमारे संसाधनों, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों पर दबाव डालते हैं। लाखों की संख्या में अवैध प्रवासियों की इस विकराल समस्या के समाधान के लिए हमारा समाधान अब और इंतजार नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, "हर गुजरते दिन के साथ हम समाधान का इंतजार करते हैं, मुद्दा और अधिक जटिल हो जाता है और इसका समाधान करने की जरूरत है।" (भाषा इनपुट)

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