दिल्ली के उपराज्यपाल, सरदार टी.एस. संधू ने आज 'वर्ल्ड हैबिटेट डे', 'वर्ल्ड सिटीज़ डे' और 'वर्ल्ड टाउन प्लानिंग डे' के उपलक्ष्य में युवा योजनाकारों (यंग प्लानर्स) के लिए आयोजित एक दिवसीय सेमिनार को संबोधित किया। इस अवसर पर नेशनल इकोनॉमिक फोरम के कार्यकारी निदेशक जगदीप राणा; स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) के चेयरपर्सन प्रो. हबीब खान; इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, इंडिया (ITPI) के अध्यक्ष प्रदीप कपूर; और कई जाने-माने टाउन प्लानर, विशेषज्ञ तथा प्रतिनिधि मौजूद थे।
अर्बन प्लानिंग मूल उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना
इस मौके पर उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू ने कहा कि शहरी नियोजन (अर्बन प्लानिंग) का मूल उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। किसी शहर की गुणवत्ता इस बात से झलकती है कि वहां रहने वाले लोगों को कितनी आसानी से आवास मिल पाता है, वे कितनी सुगमता से काम पर जा सकते हैं, सार्वजनिक स्थानों का उपयोग कर सकते हैं और जरूरी सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। प्रधानमंत्री की इस बात का जिक्र करते हुए कि 'अमृत काल' में भारतीय शहरों का भविष्य शहरी नियोजन पर ही निर्भर करेगा, उन्होंने कहा कि आज योजनाकारों द्वारा लिए गए फैसले ही आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध अवसरों और उनके जीवन की गुणवत्ता को तय करेंगे। उन्होंने कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण जमीन, आवास, परिवहन, पानी और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर दबाव पड़ता है। ऐसे में, शहरी नियोजन का काम समुदायों के हितों की रक्षा करते हुए इस विकास को सही ढंग से प्रबंधित करना है।
दिल्ली को बढ़ती शहरी आबादी की जरूरतों को पूरा करना होगा
दिल्ली के संदर्भ में, उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू ने कहा कि अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत वाली राष्ट्रीय राजधानी को अपने मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए, बढ़ती शहरी आबादी की जरूरतों को पूरा करना होगा। इसके लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाने और प्रभावी समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने जोर दिया कि दिल्ली को व्यापक 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र' (NCR) के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए, जहां विभिन्न एजेंसियों और पड़ोसी क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय हो, और भूमि-उपयोग की योजना परिवहन बुनियादी ढांचे के साथ तालमेल बिठाकर बनाई जाए।
इन तीन प्रमुख क्षेत्रों पर काम करने की जरूरत
तीन प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डालते हुए, उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू ने कहा कि शहरी जल प्रबंधन में जल निकासी (ड्रेनेज), वर्षा जल संचयन, जल निकायों के संरक्षण और भूमि के जिम्मेदार उपयोग को एक साथ शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही, प्राकृतिक जल निकासी प्रणालियों की सुरक्षा होनी चाहिए और नए विकास कार्यों में जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन (क्लाइमेट रेजिलिएंस) शामिल किया जाना चाहिए। आवागमन (मोबिलिटी) के संबंध में, उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान रोजमर्रा के सफर को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और कुशल बनाने पर होना चाहिए। सड़कों और परिवहन सुविधाओं को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वे महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों की जरूरतों को पूरा कर सकें। किफायती आवास के बारे में उन्होंने कहा कि घरों की संख्या के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता, स्थान और कनेक्टिविटी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इन आवासों का जुड़ाव रोजगार के अवसरों, परिवहन सुविधाओं, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच के साथ होना चाहिए।
शहरों में रहने वाले और काम करने वाले लोगों से जुड़ें
युवा योजनाकारों को संबोधित करते हुए, उपराज्यपाल (LG) सरदार टी.एस. संधू ने कहा कि जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS), रिमोट सेंसिंग, डिजिटल मैपिंग और अर्बन एनालिटिक्स जैसे उपकरण साक्ष्य-आधारित निर्णयों में मदद कर सकते हैं। हालांकि, तकनीक का इस्तेमाल हमेशा पेशेवर समझ, स्थानीय ज्ञान और लोगों की जरूरतों की स्पष्ट समझ के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने योजनाकारों को सलाह दी कि वे शहरों को समझने के लिए वहां रहने और काम करने वाले लोगों से सीधे जुड़ें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जमीन, आवास और बुनियादी ढांचे से जुड़े फैसले आने वाली कई पीढ़ियों के लिए समुदायों की रूपरेखा तय करते हैं, इसलिए ऐसे फैसले साक्ष्य, निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनहित पर आधारित होने चाहिए।
उपराज्यपाल ने योजना (प्लानिंग) के पेशे को आगे बढ़ाने में ITPI की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने 'स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर', 'सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट' और अन्य साझेदारों के साथ ITPI के जुड़ाव की सराहना की। उन्होंने ITPI, इसके सहयोगी संस्थानों और सभी प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएं दीं।