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ग्रेटर नोएडा: शारदा यूनिवर्सिटी ने भी तोड़ा तुर्की से संबंध, हर साल पढ़ने आते थे बच्चे

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : May 17, 2025 02:40 pm IST,  Updated : May 17, 2025 02:40 pm IST

शारदा यूनिवर्सिटी ने तुर्की की दो यूनिवर्सिटी से अपना बॉन्ड तोड़ दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देशभर में तुर्की के खिलाफ अभियान चल रहा है।

Sharda University - India TV Hindi
शारदा यूनिवर्सिटी Image Source : FILE

ग्रेटर नोएडा: भारत-पाक तनाव के बीच तुर्की की भूमिका से नाराजगी का दौर जारी है। हालांकि अब तनाव तो खत्म हो चुका है लेकिन तुर्की के प्रति लोगों का गुस्सा कम नहीं हो रहा है। इस बीच खबर मिली है कि ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी ने भी तुर्की से संबंध तोड़ दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

शारदा यूनिवर्सिटी ने तुर्की की दो यूनिवर्सिटी से एजुकेशनल रिलेशन तोड़ दिए हैं। भारत में शारदा यूनिवर्सिटी से हर साल तुर्की से बच्चे पढ़ने आते थे। इनका नाम Istanbul Aydin University और Hasan Kalyoncu University था। शारदा यूनिवर्सिटी ने इन दोनों से अपना बॉन्ड तोड़ दिया है।

बता दें कि इससे पहले जामिया, जेएनयू और एलपीयू ने भी तुर्की का बायकॉट किया था। जुलाई से नया सेशन शुरू होने वाला है लेकिन अब शारदा के साथ तुर्की की यूनिवर्सिटी की एजुकेशनल पार्टनरशिप नहीं होगी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देशभर में तुर्की के खिलाफ अभियान चल रहा है। लेटर

क्यों है तुर्की को लेकर गुस्सा?

भारत-पाक तनाव के बीच तुर्की ने पाकिस्तान का साथ दिया था। यह समर्थन कई रूपों में दिखा, जैसे कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ फोन पर बातचीत, पाकिस्तान को ड्रोन और हथियारों की आपूर्ति, और कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के रुख का समर्थन। तुर्की ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की निंदा की और जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग का समर्थन किया।

तुर्की ने कश्मीर मुद्दे पर हमेशा पाकिस्तान का समर्थन किया है। एर्दोगन ने कश्मीर को लेकर भारत की नीतियों की आलोचना की और इसे पाकिस्तान के साथ अपने रुख के करीब बताया। तुर्की और भारत के संबंध हाल के वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर कश्मीर और तुर्की के भारत विरोधी बयानों के कारण। भारत के अन्य देशों (जैसे इसराइल, ग्रीस) के साथ बढ़ते संबंधों ने भी तुर्की को पाकिस्तान के करीब ला दिया। (इनपुट: राहुल ठाकुर)

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