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NSUI ने विभिन्न परीक्षाओं में अतिरिक्त प्रयास, उम्र में छूट के अलावा परीक्षाओं से पहले छात्रों के टीकाकरण कि मांग की

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : May 31, 2021 06:28 pm IST,  Updated : May 31, 2021 06:28 pm IST

एनएसयूआई कोरोना महामारी को देखते हुए विभिन्न परीक्षाओं में अतिरिक्त प्रयास एवं उम्र में छूट के साथ-साथ आगामी परीक्षाओं से पहले छात्रों के टीकाकरण कि मांग की है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन ने 12वीं की बोर्ड की परीक्षाओं को लेकर चिंता जताते हुए मंत्री

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NSUI ने विभिन्न परीक्षाओं में अतिरिक्त प्रयास, उम्र में छूट के अलावा परीक्षाओं से पहले छात्रों के टीकाकरण कि मांग की Image Source : NSUI

नई दिल्ली। एनएसयूआई कोरोना महामारी को देखते हुए विभिन्न परीक्षाओं में अतिरिक्त प्रयास एवं उम्र में छूट के साथ-साथ आगामी परीक्षाओं से पहले छात्रों के टीकाकरण कि मांग की है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन ने 12वीं की बोर्ड की परीक्षाओं को लेकर चिंता जताते हुए मंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र भी लिखा है। एनएसयूआई ने पत्र के माध्यम से मांग की है कि, सभी छात्रों का परीक्षाओं से पहले टीकाकरण किया जाए। वहीं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उम्र में छूट और अतिरिक्त प्रयास करने को भी कहा है।

पत्र में कहा गया है कि, यूपीएससी, सीए, एनईईटी (यूजी और पीजी), जेईई, एसएससी-सीएचएसएल, यूजीसी नेट, आईएनसीईटी जैसी परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को जल्द से जल्द प्राथमिकता के आधार पर टीका लगाया जाना चाहिए।

एनएसयूआई ने 'पहले सुरक्षा, फिर परीक्षा' का नारा देते हुए केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनमें से किसी भी छात्र के भविष्य से समझौता न हो। एनएसयूआई इस तथ्य पर जोर दे रहा है कि महामारी के कारण यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी, आईबीओएस, पीएससी आदि जैसी विभिन्न परीक्षाओं के कई उम्मीदवार परीक्षा में बैठने का अवसर खो रहे हैं, इसलिए सरकार को ऐसे सभी उम्मीदवारों के लिए भी नीति बनानी चाहिए।

नीरज कुंदन के अनुसार, " छात्र अपनी चिंताओं को उठाते रहते हैं और सरकार उनकी अनदेखी करती रहती है। यह हम पहले भी कह चुके हैं और फिर से कह रहे हैं, हमारे साथी छात्रों के जीवन से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं है। अगर वे परीक्षा में शामिल हुए तो उनकी जान को खतरा होगा और अगर ऐसा नहीं किया तो उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। छात्र भ्रमित और घबराए हुए हैं। लेकिन मोदी सरकार कुछ नहीं कर रही।"

 

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