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UGC ने नौ UG विषयों के लिए LOCF का ड्राफ्ट जारी किया, वीडी सावरकर की इस किताब को किया शामिल

 Reported By: Ila Kazmi, Edited By: Akash Mishra
 Published : Aug 26, 2025 02:32 pm IST,  Updated : Aug 26, 2025 02:34 pm IST

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नौ स्नातक विषयों के लिए लर्निंग आउटकम्स-आधारित पाठ्यचर्या रूपरेखा (एलओसीएफ) का एक मसौदा जारी किया है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : UNSPLASH

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC ने नौ स्नातक विषयों के लिए अधिगम परिणाम-आधारित पाठ्यचर्या रूपरेखा (LOCF) का मसौदा जारी किया है। यूजीसी का कहना है कि यह रूपरेखा शिक्षा को रटकर सीखने से व्यावहारिक और परिणाम-आधारित अध्ययन की ओर मोड़ने के लिए डिजाइन की गई है, जो छात्रों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जोड़ेगी। एलओसीएफ में फील्डवर्क, प्रयोगशाला कार्य और इंटरैक्टिव असाइनमेंट के साथ-साथ आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान और विश्लेषणात्मक कौशल पर जोर दिया गया है। साथ ही, यह मसौदा भारत की ज्ञान परंपराओं पर जोर देता है।

  • रसायन विज्ञान: सरस्वती वंदना से शुरू होकर इसमें आयुर्वेद, सिद्ध और होम्योपैथी के मॉड्यूल शामिल हैं। छात्र पारंपरिक औषधियों और उपचार पद्धतियों में दूध, जल और शहद की भूमिका के बारे में जानेंगे। पारंपरिक भारतीय पेय पदार्थ भी इस पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं।
  • गणित: इसमें काल गणना (समय-निर्धारण विधियाँ), सूत्र-आधारित अंकगणित, शुल्ब सूत्रों से ज्यामिति, और सूर्य सिद्धांत एवं आर्यभट्टीयम जैसे ग्रंथों से खगोलीय अवधारणाएं शामिल हैं। यह युग, कल्प और ब्रह्मा के दिन जैसे ब्रह्मांडीय चक्रों के साथ-साथ पंचांग (हिंदू कैलेंडर) गणनाओं और भारतीय वेधशालाओं का परिचय देता है। आर्यभट्ट, रामानुजन और कापरेकर के योगदान पर प्रकाश डाला गया है।
  • कॉमर्स: इसमें कौटिल्य का अर्थशास्त्र, राम राज्य के विचार से जुड़ी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी, भगवद गीता से नेतृत्व की शिक्षाएं, तथा भारत बोध, विकसित भारत और भारतीय ज्ञान परंपराओं पर मॉड्यूल शामिल हैं।
  • मानवशास्त्र: इसमें चरक और सुश्रुत की रचनाएं शामिल हैं।
  • इतिहास: स्वतंत्रता संग्राम पाठ्यक्रमों के लिए अनुशंसित पठन सामग्री के रूप में वी. डी. सावरकर की पुस्तक "द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस" को सूचीबद्ध किया गया है। 

सावरकर की किताब को शामिल करने विवाद

सावरकर की पुस्तक "द इंडियन वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस" को शामिल करने पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। आलोचकों का तर्क है कि सावरकर पर भरोसा करने से ऐतिहासिक आख्यानों के विकृत होने का खतरा है।

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