नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर को कार्डियक अरेस्ट के चलते निधन हो गया। जैसे ही उनके निधन की खबर आई, जहां कई लोग स्तब्ध रह गए तो कई के लिए ये मानना बेहद मुश्किल था कि कल तक एक दम फिट नजर आ रहे नाना अब इस दुनिया में नहीं रहे। निधन से चार दिन पहले ही नाना पाटेकर एक इवेंट में शामिल हुए थे, इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसी बातें कही थीं, जिसे सुनकर उनके फैंस भावुक हो गए। अब भी उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बीच टीवी एक्ट्रेस साई देवधर ने भी नाना पाटेकर के निधन पर शोक व्यक्त किया है और साथ ही उनसे अपने परिवार के करीबी और भावनात्मक रिश्ते के बारे में भी बात की। साई ने बताया कि नाना पाटेकर उनकी मां के मुंहबोले भाई थी।
नाना पाटेकर से साई देवधर का था गहरा नाता
साई देवधर ने टेली टॉक इंडिया से बातचीत के दौरान कहा- 'मुझे अब तक यकीन नहीं हो पा रहा है कि वो इस दुनिया में नहीं रहे। मेरी मां की उनसे चार दिन पहले ही बात हुई थी। वह हमारे परिवार के बेहद करीब थे। मैं उन्हें अपनी फिल्म की स्क्रीनिंग के चलते कॉल करने वाली थी और उन्हें आज बुलाने वाली थी। लेकिन, ये खबर आ गई। वह मेरे मामा थे, मेरे मुंहबोले मामा। वह मेरे माता-पिता के उस वक्त से दोस्त थे, जब वह स्टार नहीं बने थे। मैं जब छोटी थी तो वो अक्सर घर आते थे और फिर हमें खाना खाने या आइसक्रीम खिलाने के लिए बाहर ले जाते थे।'
साई ने सुनाया नाना पाटेकर से जुड़ा अनसुना किस्सा
इसी बातचीत के दौरान साई ने नाना पाटेकर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया। उन्होंने कहा- 'एक दिन हम आइक्रीम खाने गए थे। नाना काका को लगा कि मेरे पिता के पास पैसे हैं और पापा को लगा कि उनके पास पैसे हैं। लेकिन जैसे ही हम आइसक्रीम खाने पहुंचे, हममें से किसी के पास पैसे नहीं थे। मेरे माता-पिता उनकी फिल्म 'प्रहार' से जुड़े थे। उनकी फिल्म 'प्रहार' से भी मेरे माता-पिता जुड़े थे और मैंने भी उस फिल्म में काम किया था। मैंने भी उस फिल्म में काम किया था। मैंने डिंपल की बेटी का किरदार निभाया था। फिल्म के दौरान मेरे माता-पिता और नाना काका अक्सर साथ समय बिताते थे और वो उनके सबसे करीबी दोस्त थे। इसलिए उनका घर आना-जाना था। मेरे पिता नाना काका के दाहिने हाथ जैसे थे।'
साई के माता-पिता की आर्थिक मदद की
साई ने बताया कि नाना पाटेकर उनके माता-पिता की आर्थिक मदद भी करते थे। वह कहती हैं- 'वह बहुत साफ और सच्चे इंसान थे। कभी-कभी बच्चों के जैसे अचानक गुस्सा हो जाते थे। मेरे माता-पिता एक चॉल में रहते थे, नाना काका मेरी मां को बहन मानते थे और अपनी कमाई का 10 फीसदी हिस्सा उन्हें देते थे। उन्होंने जो चीजें हमारे लिए कीं, उसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती। मैं और मल्हार साथ-साथ ही बड़े हुए हैं। वह किसी को परेशान करके नहीं जाना चाहते थे। हमेशा कहते थे कि मैं जब जाऊंगा तो ऐसे जाऊंगा। भगवान ने भी उनकी गरिमा बनाए रखी।'