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'ये सिर्फ पैसों का मामला नहीं था', चेक बाउंस केस पर राजपाल यादव का बड़ा खुलासा, 5 करोड़ का कर्ज बना 22 करोड़ का घाटा

 Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
 Published : Apr 22, 2026 12:57 pm IST,  Updated : Apr 23, 2026 11:50 am IST

कानूनी विवाद और तिहाड़ जेल के अनुभव पर राजपाल यादव ने पहली बार खुलकर बात की और इस बातचीत के दौरान कई खुलासे भी हुए हैं। उन्होंने कहा, 'यह केवल पैसे का मामला नहीं था।'

Rajpal Yadav- India TV Hindi
राजपाल यादव। Image Source : RAJPAL YADAV INSTAGRAM

अपनी बेमिसाल कॉमेडी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों ₹9 करोड़ के कर्ज और चेक बाउंस मामले के कारण चर्चा में हैं। हाल ही में तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने इस पूरे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। राजपाल ने संकेत दिया है कि जनता के बीच इस मामले को लेकर जो धारणा बनी है, सच्चाई उससे कहीं अधिक जटिल और गहरी है। उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति, भारी घाटा और उससे निकलने के अपने अनुभव को साझा किया है।

सिद्धांत और धोखे की लड़ाई

शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान राजपाल यादव ने अपने कानूनी संघर्ष के विभिन्न पहलुओं पर खुलकर बात की। जब उनसे पूछा गया कि इतने बड़े करियर और दर्जनों फिल्मों के बावजूद क्या वह ₹5 करोड़ जैसा मामूली कर्ज नहीं चुका सकते थे तो उन्होंने बेहद संजीदगी से जवाब दिया। राजपाल ने कहा, 'यही तो असली सवाल है... जिस दिन लोग इस बात को समझ जाएंगे, वे मेरा पूरा केस समझ जाएंगे। मुझे पैसे की कमी के कारण जेल नहीं भेजा गया था, बल्कि यह एक बड़े मुद्दे और सिद्धांतों की लड़ाई थी।' उन्होंने दावा किया कि यदि मामला केवल ₹5 करोड़ का होता तो इसे 2012 में ही सुलझा लिया गया होता। राजपाल के अनुसार इस विवाद की वजह से उन्हें ₹17 से ₹22 करोड़ तक का भारी नुकसान हुआ। उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, 'ये 5 करोड़ का मसला होता तो 2012 में निपटता। इस 5 करोड़ ने 17 करोड़ को डुबाने का काम किया है।' 

फिल्म प्रोजेक्ट और विवाद की जड़

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि फिल्म इंडस्ट्री में अगर कोई फिल्म फ्लॉप हो जाती है तो उसे धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता। इस विवाद की जड़ में उनकी निर्देशित फिल्म 'अता पता लापता' (2012) है। राजपाल ने खुलासा किया कि फिल्म का एक बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका था और उस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके थे। उन्होंने कहा, '12 करोड़ पहले ही दिए जा चुते हैं, ये अब 22 करोड़ का मामला बन गया है। जब दुश्मन भी किसी प्रोजेक्ट में शामिल हों तो उन्हें फिल्म रिलीज होने देनी चाहिए ताकि दर्शक फैसला कर सकें।' राजपाल ने देश की न्यायपालिका पर अटूट विश्वास जताते हुए कहा कि यह लड़ाई उन्होंने शुरू नहीं की थी, लेकिन वह इसे खत्म जरूर करेंगे।

क्या था पूरा कानूनी मामला?

यह मामला 2010 में शुरू हुआ था जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म के लिए दिल्ली स्थित मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की असफलता के बाद वह कर्ज चुकाने में असमर्थ रहे, जिससे कानूनी विवाद शुरू हो गया। 2018 में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई। धीरे-धीरे ब्याज और कानूनी पेचीदगियों के कारण यह राशि बढ़कर लगभग ₹9 करोड़ हो गई। इस साल फरवरी में भुगतान न कर पाने के कारण उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। हालांकि 16 फरवरी को उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई। इस कठिन समय में सोनू सूद और मीका सिंह जैसे कई फिल्मी सितारों ने खुलकर उनका समर्थन किया। बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी उन्हें राहत प्रदान की।

राजपाल का वर्कफ्रंट 

कानूनी बाधाओं के बावजूद राजपाल यादव पर्दे पर वापसी कर चुके हैं। उन्हें हाल ही में प्रियदर्शन द्वारा निर्देशित हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'भूत बंगला' में देखा गया। इस फिल्म में उनके साथ अक्षय कुमार, परेश रावल, तब्बू और वामिका गब्बी जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। अपनी रिहाई के बाद राजपाल अब एक बार फिर अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। वो कई और फिल्मों में नजर आने वाले हैं, जिसमें 'वेलकम टू द जंगल' शामिल है।

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