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Babita Singh Reporting Review: फर्ज, दोस्ती और संघर्ष के बीच उलझी बबीता सिंह की कहानी, निमिषा सजयन ने लूटी महफिल

 Written By: Himanshi Tiwari
 Published : Aug 28, 2026 12:08 am IST,  Updated : Aug 28, 2026 10:24 am IST

बबीता सिंह रिपोर्टिंग प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। इसमें निमिषा सजयन एक महिला पुलिसकर्मी की भूमिका निभा रही हैं, जो सस्पेंड होने के बावजूद अपने दोस्त की हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी हैं। इस क्राइम थ्रिलर में बरुण सोबती, राजेश कुमार भी हैं।

Babita Singh Reporting Review
बबीता सिंह रिपोर्टिंग रिव्यू Photo: INSTAGRAM/@PRIMEVIDEOIN
  • फिल्म रिव्यू: बबीता सिंह रिपोर्टिंग
  • स्टार रेटिंग 2.5/5
  • पर्दे पर: अगस्त 28, 2026
  • डायरेक्टर: अंबिका पंडित
  • शैली: क्राइम थ्रिलर

प्रोफेशनल जिम्मेदारियों, पर्सनल स्ट्रगल और खुद को साबित करने की लगातार लड़ाई के बीच फंसी यूनिफॉर्म में महिलाओं ने देश और परिवार के लिए बहुत कुछ किया है। ऐसे में महिला पुलिस के किरदारों ने दर्शकों पर गहरा असर डाला है। अब बबीता सिंह रिपोर्टिंग में निमिषा सजयन ने असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर बन सभी का दिल जीत लिया। यह फिल्म एक नई कॉप को स्पॉटलाइट में लाती है, जिसमें बबीता का किरदार प्रोफेशनल चुनौतियों और पर्सनल झगड़ों का मिक्सचर देने का वादा करता है जो बात इस प्रोजेक्ट को खास तौर पर रोमांचक बनाती है। 'बबीता सिंह रिपोर्टिंग' में एक दिलचस्प क्राइम ड्रामा के सभी एलिमेंट हैं, खासकर इसके सेंटर में एक मजबूत महिला हीरोइन। निमिषा सजयन की शानदार एक्टिंग फिल्म को और भी दिलचस्प बनाती है और बबीता का किरदार कहानी की जान है, जिसे कोई चाहकर भी नजरअंदाज नहीं कर सकता था।

बबीता सिंह रिपोर्टिंग की कहानी

बबीता सिंह रिपोर्टिंग की शुरुआत बबीता सिंह से होती है, जिसे प्यार से बेबी बुलाया जाता है जो अपने सीनियर ऑफिसर, जिसका रोल राजेश कुमार ने किया है। उसे छुट्टी के लिए मंजूरी पाने की कोशिश करती है। वह अपने सीनियर ऑफिसर का बाइक पर पुलिस स्टेशन आते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड करती है और उम्मीद करती है कि इस छोटे से फेवर से उसकी छुट्टी मंजूर हो जाएगी ताकि वह अपने ससुराल जा सके, लेकिन उसका सीनियर उसे एक झूठ बोलने को कहता है, जिसके बाद उसे दो हफ्ते के लिए सस्पेंड किया जाएगा और वह अपने ससुराल जा सकेगी। ऐसे में बबीता समझौता करने को तैयार हो जाती है। इसके बाद उसे नौकरी से सस्पेंड कर दिया जाता है। मजे की बात यह है कि यह मुश्किल दौर उसे उसके बचपन के दोस्त बंसी के पास वापस ले जाता है, जिसका रोल बरुण सोबती ने किया है, लेकिन बंसी से उसका मिलना एक दुखद मोड़ ले लेता है, जब बंसी की संदिग्ध हालात में मौत हो जाती है।

कहानी को और दिलचस्प बनाने वाली बात बबीता का कम सपोर्ट होने के बावजूद सच को सामने लाने का पक्का इरादा है। उसका पति और परिवार उसे रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन वह इन्वेस्टिगेशन छोड़ने से मना कर देती है। यह केस बहुत पर्सनल हो जाता है, जिससे इंसाफ के लिए उसकी लड़ाई एक इमोशनल सफर में बदल जाती है। कहानी के अंत में दिखाया जाता है कि कातिल कोई करीबी है। कहानी में आगे क्या होता है, जब सच्चाई सामने आई है। यह फिल्म के सेंट्रल आइडिया को पूरी तरह से दिखाता है, जहां बबीता की प्रोफेशनल सोच एक ऐसे केस से टकराती है जो उसके दिल के बहुत करीब है।

बबीता सिंह रिपोर्टिंग की कास्ट परफॉर्मेंस

ASI बबीता सिंह के रोल में निमिषा सजयन, बबीता सिंह रिपोर्टिंग का सबसे मजबूत हिस्सा हैं। वह एक पक्के इरादे वाले पुलिस ऑफिसर के रोल में पूरी तरह फिट बैठती हैं और एक पत्नी, दोस्त और पुलिस वाले के तौर पर बबीता की जिम्मेदारियों को अच्छे से दिखाती हैं। उनकी परफॉर्मेंस कैरेक्टर में गहराई लाती है, खासकर इमोशनल और इन्वेस्टिगेटिव पलों में। निमिषा एक मशहूर इंडियन एक्ट्रेस हैं, जो मलयालम सिनेमा में अपनी दमदार परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती हैं। इस रोल से उन्होंने एक बार फिर अपनी शानदार एक्टिंग साबित की है।

बबीता सिंह के पति शरद वशिष्ठ के रोल में अंशुमान पुष्कर एक सपोर्टिव पति के तौर पर अच्छी परफॉर्मेंस देते हैं। वह कैरेक्टर में अच्छी तरह फिट बैठते हैं। हालांकि, कुछ सीन में उनकी परफॉर्मेंस निमिषा सजयन की मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के आगे दब जाती है।

SI सेठी के रोल में राजेश कुमार एक मतलबी और मौकापरस्त पुलिस ऑफिसर के तौर पर उभरकर आते हैं, जो अपने करियर की ग्रोथ को लेकर ज्यादा फिक्रमंद रहता है। एक करप्ट पुलिस वाले का उनका रोल भरोसेमंद लगता है और कैरेक्टर में पूरी तरह फिट बैठता है।

नवल शुक्ला एक सच्चे और जिम्मेदार स्टेशन हाउस ऑफिसर SHO के तौर पर सच्ची परफॉर्मेंस देते हैं। उनका संयमित अभिनय किरदार के अनुसार ठीक लगता है और पुलिस पर भरोसा करने के लिए काफी है।

बंसी सेनी के रूप में बरुण सोबती का स्क्रीन टाइम कम है, लेकिन गहरी छाप छोड़ता है। कुछ ही सीन में दिखने के बावजूद, उनका किरदार जांच को आगे बढ़ाने और कहानी में एक नया मोड़ लाने में अहम भूमिका निभाता है।

बबीता सिंह की सास के रूप में सुनीता राजवार एक ऐसा किरदार निभाती हैं, जो भारतीय घरों में अक्सर देखी जाने वाली पारंपरिक सास की जानी-पहचानी छवि को दिखाता है। वह अपनी सामान्य सहजता और स्वाभाविक एक्टिंग को भूमिका में लाती हैं और इसे भरोसेमंद तरीके से निभाती हैं।

बबीता सिंह रिपोर्टिंग का निर्देशन

अंबीका पंडित की डायरेक्ट की हुई बबीता सिंह रिपोर्टिंग हर किरदार के इमोशन को दिखाने की कोशिश करती है। निमिषा सजयन, बरुण सोबती, अंशुमान पुष्कर और बाकी कलाकारों को ऐसे रोल दिए गए हैं, जो कहानी में नैचुरली फिट बैठते हैं। अंबीका पंडित के डायरेक्शन की एक खूबी यह भी थी कि हर किरदार पर फोकस किया है। कहानी को सिर्फ इन्वेस्टिगेशन के बारे में बनाने के बजाय वह एक महिला पुलिस ऑफिसर की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को भी दिखाती हैं, जिससे बबीता सिंह के किरदार को और गहराई मिलती है। हालांकि, कुछ जगह कमी भी देखने को मिली। कुछ सीन बेवजह खींचे हुए लगते हैं और इन्वेस्टिगेशन में कुछ नया नहीं देखने को मिलता। जैसे बबीता अपने आर्टिस्ट दोस्त बंसी के मर्डर से जुड़े सुराग ढूंढते हुए बार-बार घने जंगल में जाती है, लेकिन उसे वहां कुछ नहीं मिलता। ये सीक्वेंस रिपिटिटिव हो जाते हैं और कहानी को बोरिंग बनाता है। कई बार बेवजह का ड्रामा भी मेन कहानी के असर को कम कर देता है। अंबीका पंडित का निर्देशन सबसे ज्यादा तब प्रभावी लगता है, जब वह बबीता के एक पुलिस ऑफिसर और महिला के रूप में अपनी निजी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कहानी दिखाती हैं। सपोर्टिंग कैरेक्टर्स को अहमियत देने की कोशिश भी तारीफ के काबिल है। हालांकि, बेहतर एडिटिंग और बेहतर पेस से फिल्म और भी दिलचस्प बन सकती थी।

बबीता सिंह रिपोर्टिंग में क्या अच्छा है और क्या नहीं

बबीता सिंह रिपोर्टिंग की सबसे खास बात इसका महिला सशक्तिकरण पर फोकस है, जिसे बबीता सिंह के किरदार के जरिए बखूबी दिखाया गया है। शो में उन्हें एक ऐसी महिला के तौर पर दिखाया गया है, जो कॉन्फिडेंस के साथ दो मुश्किल रोल निभाती है - एक होममेकर और एक ASI ऑफिसर। उनके कैरेक्टर को मजबूत, पक्के इरादे वाली और हिम्मत वाली दिखाया गया है, जिससे उनका सफर रिलेटेबल और इंस्पायरिंग लगता है।

हालांकि, फिल्म की एडिटिंग और रफ्तार थोड़ी कमजोर लगती है। कुछ बातचीत में वही बातें और भावनाएं बार-बार दोहराई गई हैं, जिससे कहानी के कुछ हिस्से लंबे और खिंचे हुए लगते हैं। मौजूदा सबप्लॉट को बढ़ाने के बजाय कहानी को कुछ सपोर्टिंग कैरेक्टर्स को और गहराई से दिखाने से फायदा हो सकता था। ड्रामैटिक पलों के दौरान बैकग्राउंड स्कोर अच्छा काम करता है और खास सीन में इंटेंसिटी जोड़ता है। हालांकि, कभी-कभी ऐसा लगता है कि यह इमोशंस को परफॉर्मेंस और स्टोरीटेलिंग के जरिए नैचुरली डेवलप होने देने के बजाय उन्हें बहुत ज्यादा जोर से दबा रहा है। हालांकि, कहानी को और शानदार बनाया जा सकता था, लेकिन बबीता का किरदार शो की सबसे बड़ी ताकत है।

बबीता सिंह रिपोर्टिंग कैसी है?

बबीता सिंह रिपोर्टिंग सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री से कहीं ज्यादा है। यह फिल्म एक बहादुर औरत की कहानी बताती है जो कई जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी में बैलेंस बनाने की कोशिश करती है। यह उसकी हिम्मत, संघर्ष और अपनी ड्यूटी करते समय आने वाली चुनौतियों को दिखाती है। फिल्म की सबसे अच्छी बातों में से एक है इसकी सीधी-सादी कहानी। यह बिना फालतू डिटेल्स जोड़े मेन पॉइंट पर आती है, जिससे कहानी को समझना आसान हो जाता है।

हालांकि, फिल्म में कुछ कमियां हैं। कुछ हिस्से धीमे लगते हैं और पूरी रफ्तार पर असर डालते हैं। फिर भी दमदार परफॉर्मेंस और शानदार डायरेक्शन फिल्म को आखिर तक दिलचस्प बनाए रखते हैं।

बबीता सिंह रिपोर्टिंग के लिए 2.5/5 स्टार।

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