'मेड इन इंडिया ए टाइटन स्टोरी' एक ऐसी कहानी बताने की कोशिश करती है जो महत्वाकांक्षी भी है और भारत की औद्योगिक और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ी भी। यह टाइटन के उदय की कहानी बताती है, एक ऐसा ब्रांड जो आज भरोसे और इनोवेशन का पर्याय बन चुका है और साथ ही उन लोगों पर भी रोशनी डालती है जिन्होंने इसे मुमकिन बनाया। इसके केंद्र में हैं नसीरुद्दीन शाह JRD Tata के रूप में और जिम सरभ Xerxes Desai के रूप में, इन दोनों के दमदार अभिनय ने ही इस शो को इतना वजनदार बनाया है। शुरू से ही यह सीरीज बहुत ही सोच-समझकर लिखी गई लगती है। इसकी कहानी की नींव बहुत मजबूत है, जिसमें कई अलग-अलग पहलू शामिल हैं, सिर्फ कारोबारी फैसले ही नहीं, बल्कि आपसी रिश्ते, महत्वाकांक्षा और मुश्किलों से जूझने का जज्बा भी। हां, यह भी सच है कि कागज पर जो विचार जितने असरदार लगे होंगे, वे सभी परदे पर उतने असरदार ढंग से नहीं उतर पाए हैं। शाह और सरभ जैसे दिग्गज कलाकारों के होने के बावजूद कुछ पल ऐसे भी हैं जहां लगता है कि उन्हें और बेहतर ढंग से पेश किया जा सकता था।
फिर भी यह शो अपने सभी छह एपिसोड में लगातार दर्शकों को बांधे रखता है। यह आपको अपनी ओर खींचता रहता है, इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि आप यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि आगे क्या होने वाला है। इसकी कहानी कहने के अंदाज में एक ऐसी ईमानदारी है जो इसके पक्ष में काम करती है और इस ईमानदारी को और भी मजबूती मिलती है शाह के शांत और नपे-तुले अंदाज सेऔर सरभ के जोशीले और जुनूनी अंदाज से।
कहानी का सार
इस सीरीज का मुख्य विषय है टाइटन का सफर, उसके शुरुआती दिनों से लेकर बाजार में एक बड़ा नाम बनने तक का सफर। नसीरुद्दीन शाह द्वारा निभाया गया JRD Tata का किरदार इस कहानी में एक स्थिर और मार्गदर्शक शक्ति के रूप में मौजूद रहता है, वहीं जिम सरभ द्वारा निभाया गया Xerxes Desai का किरदार एक जोशीला और दूरदर्शी तत्व है, जो अक्सर ऐसे जोखिम भरे फैसले लेता है जो कंपनी को उसके भविष्य की ओर ले जाने में मददगार साबित होते हैं। सिर्फ उपलब्धियों की एक सूची गिनाने के बजाय 'मेड इन इंडिया ए टाइटन स्टोरी' उन लोगों पर रोशनी डालती है जिन्होंने इस ब्रांड को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। यह सीरीज सब कुछ दिखाती है, आपसी टकराव, मन में उठने वाले सवाल, बड़ी-बड़ी असफलताएं, छोटी-छोटी सफलताएं और फिर कई जीत। इस कहानी का एक और अहम पहलू है JRD Tata और Xerxes Desai के बीच का गहरा रिश्ता।
इस शो की एक और भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उस दौर की भावना और माहौल को पूरी तरह से अपने में समेट लेता है। उस जमाने की सामाजिक और आर्थिक सच्चाइयों का इस कहानी में बहुत बड़ा योगदान है। आप यहां सिर्फ एक कंपनी को आगे बढ़ते हुए ही नहीं देखते, बल्कि आप उस पूरे माहौल को भी देखते हैं जिसके बीच रहकर उस कंपनी को आगे बढ़ना था। सबसे असरदार तरीकों में से एक है असल जिंदगी की फुटेज और पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल। ये चीजें कहानी को ज्यादा असली बनाती हैं और कभी-कभी तो एक खास तरह का जज्बाती जुड़ाव भी पैदा करती हैं। फिर भी कहानी की रफ्तार हमेशा एक जैसी नहीं रहती। कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां सीन जरूरत से ज्यादा लंबे खिंच जाते हैं, जिससे कहानी की गति धीमी पड़ जाती है। इससे शो पूरी तरह से खराब तो नहीं होता, लेकिन आपको यह कमी जरूर महसूस होती है। इसके बावजूद कहानी का मुख्य सफर इतना दिलचस्प बना रहता है कि आप इसमें पूरी तरह से डूबे रहते हैं।
लेखन और निर्देशन
लेखन में साफ तौर पर काफी मेहनत और रिसर्च नजर आती है। डायलॉग ज्यादातर संयमित हैं, जो इस सीरीज के मिजाज के हिसाब से एकदम सही बैठते हैं। इसमें बेवजह का ड्रामा बहुत कम है और जज्बाती पलों को भी काफी संजीदगी से पेश किया गया है। जहां यह थोड़ी कमजोर पड़ती है, वह है इसका एग्जीक्यूशन। कुछ आइडिया जो कागज पर तो बहुत दमदार लगते हैं, वे परदे पर आते ही अपना उतना असर नहीं दिखा पाते। कभी-कभी कहानी का प्रवाह थोड़ा टूटा-टूटा सा लगता है, इसकी मुख्य वजह विस्तृत जानकारी और ड्रामा के बीच सही तालमेल बिठाने की कोशिश है। जहां तक निर्देशन की बात है तो इसमें कई दिलचस्प चीजे देखने को मिलती हैं। सबसे पहले आपको कई बेहतरीन क्लोज-अप शॉट्स देखने को मिलेंगे खासकर उन सीन्स में जहां जज्बात हावी होते हैं। दर्शकों के लिए किरदारों की बातें सुनने के बजाय उनके चेहरों के हाव-भाव पर ध्यान देना ज्यादा दिलचस्प होता है। समय के गुजरने को जिस तरह से दिखाया गया है, उसके लिए भी मेकर्स की तारीफ होनी चाहिए। आप किरदारों को उम्रदराज होते हुए महसूस करते हैं, साथ ही अलग-अलग एपिसोड्स में माहौल में आए बदलावों को भी देख पाते हैं और यह सब काफी विश्वसनीय लगता है।
संगीत और तकनीकी पहलू
तकनीकी लिहाज से यह सीरीज काफी मजबूत है। पुरानी फुटेज और कंटेंट का इस्तेमाल इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। यह कहानी को विश्वसनीयता तो देता ही है, लेकिन उससे भी बढ़कर, यह शो में एक खास तरह की गर्माहट और पुरानी यादों का एहसास जगाता है। पुराने मुंबई, तमिलनाडु और बैंगलोर के माहौल को जिस तरह से दोबारा रचा गया है, वह भी तारीफ के काबिल है। इन जगहों को बनाने और पेश करने के तरीके में बारीकियों पर साफ तौर पर ध्यान दिया गया है। ये जगहें बनावटी या सेट जैसी नहीं, बल्कि एकदम असली और जीवंत लगती हैं और यही बात इसे खास बनाती है।
पुराने हिंदी और तमिल गानों का इस्तेमाल करना भी एक बेहतरीन आइडिया है। इन गानों को बस यूं ही बेतरतीब ढंग से नहीं डाल दिया गया है, बल्कि कहानी में इनका एक खास मकसद है। कभी-कभी ये गाने चुपके से किसी सीन को और भी ज्यादा असरदार बना देते हैं बिना खुद पर ज्यादा ध्यान खींचे, ये सीन में जज्बाती गहराई भर देते हैं। ये गाने उस दौर को मजबूती से उभारने में भी मदद करते हैं और जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, ये सीरीज को एक पुरानी और जी हुई सी फील देते हैं। बैकग्राउंड स्कोर ज्यादातर जगह हल्का और सॉफ्ट ही, जो कि अच्छा है। यह खुद को अलग दिखाने की कोशिश किए बिना कहानी को सपोर्ट करता है। हो सकता है कि शो खत्म होने के बाद आपको यह याद न रहे, लेकिन यह अपना काम बखूबी करता है।
एक्टिंग
Made in India: A Titan Story की सबसे मजबूत चीजों में से एक है इसकी एक्टिंग। नसीरुद्दीन शाह ने JRD Tata के किरदार में एक शांत लेकिन दमदार असर डाला है। उनकी एक्टिंग में संयम है, लेकिन वह बहुत असरदार है। उन्होंने किसी भी चीज को बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया है और यह बात उनके किरदार के लिए एकदम सही बैठती है। जर्क्सिस देसाई के किरदार में जिम सरभ भी उतने ही शानदार लगे हैं, हालांकि उनका अंदाज बिल्कुल अलग है। उनकी एक्टिंग में एक ऐसी तीव्रता है जो उन्हें सबसे अलग बनाती है। वह कहानी में जान डाल देते हैं, खासकर उन जगहों पर जहाँ जोश और पक्के इरादे की जरूरत होती है। सहायक कलाकारों ने भी अपना किरदार बखूबी निभाया है। वैभव तत्ववादी, कावेरी सेठ और लक्षवीर सिंह सरन और उनके साथ Titan के संस्थापक सदस्यों का किरदार निभाने वाले दूसरे कलाकारों ने कहानी में जान डाल दी है। वे टीम को बिल्कुल असली, लगभग एक परिवार जैसा दिखाते हैं, जो इस तरह के शो के लिए बहुत जरूरी है।
कमजोर पहलू
अपनी तमाम खूबियों के बावजूद यह सीरीज कुछ जगहों पर लड़खड़ाती है, खासकर आखिर में। पांचवें और छठे एपिसोड कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी में निपटाए गए लगते हैं। यह वह जगह थी जहां शो को थोड़ा धीमा होना चाहिए था और कहानी के नतीजे को ठीक से उभरने देना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय, यह बहुत तेजी से आगे बढ़ जाता है। कहानी को बनाने में इतना समय लगाने के बाद, उसका अंत थोड़ा अचानक सा लगता है। एक दर्शक के तौर पर आप जीत के उस पल को जी भर के महसूस करना चाहते हैं, उसे पूरी तरह से अपने अंदर उतारना चाहते हैं। यह सीरीज आपको ऐसा करने का पूरा मौका नहीं देती और यहीं पर यह सबसे ज़्यादा निराश करती है। इसके अलावा भी कुछ छोटी-मोटी कमियां हैं। कुछ दृश्यों को छोटा किया जा सकता था और कुछ जगहों पर खासकर देसाई के फैसलों के मामले में उनके पीछे की सोच के बारे में थोड़ी और जानकारी दी जाती तो बेहतर होता। कभी-कभी उनके फैसले सिर्फ़ जोखिम उठाने वाले लगते हैं, जिनके पीछे कोई ठोस वजह नहीं बताई गई होती।
वर्डिक्ट
Made in India: A Titan Story एक जरूरी कहानी को बताने की एक सच्ची कोशिश है और ज्यादातर मामलों में यह सफल भी रही है। हो सकता है कि यह हर पैमाने पर खरी न उतरे, लेकिन यह इतना तो जरूर करती है कि इसकी छाप आपके मन पर बनी रहे। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका मकसद है। यह आपको याद दिलाती है कि भारतीय प्रतिभा और लगन क्या कुछ हासिल कर सकती है। यह उन इंजीनियरों, नेताओं और विचारकों पर रोशनी डालती है जिन्होंने अपने विचारों पर तब भी भरोसा बनाए रखा, जब दूसरे उन पर शक कर रहे थे। जिस तरह से यह दिखाता है कि टीमें कैसे एक साथ आती हैं, आइडिया को हकीकत में बदलती हैं और लोगों को गलत साबित करती हैं, उसमें कुछ ऐसा है जो चुपचाप मन को सुकून देता है। हां इसकी गति थोड़ी और कसी हुई हो सकती थी और इसके अंत को थोड़ा और समय मिलना चाहिए था, लेकिन इसमें कलाकारों का अभिनय, इसकी कहानी का मूल और पूरी सीरीज की ईमानदारी इसे देखने लायक बनाती है। कुल मिलाकर 'मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी' को 5 में से 3 स्टार मिलते हैं