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'महाभारत' ही नहीं, एक और शो ने 'रामायण' को दी टक्कर, इरफान खान और रवि किशन का 8.1 रेटिंग वाला सीरियल TRP में रहा टॉपर

 Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
 Published : Apr 03, 2026 02:51 pm IST,  Updated : Apr 03, 2026 02:51 pm IST

90 के दशक में कई शोज ने लोगों का दिल जीत लिया। इसी दौर में महाभारत और रामायण जैसे टीवी शोज को टक्कर देने के लिए एक और शो रिलीज हुआ था, जो टीआरपी में भी नंबर वन था।

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रवि किशन और इरफान खान। Image Source : IMDB RATING

भारतीय टेलीविजन के इतिहास में 90 के दशक को एक गोल्डन पीरियड माना जाता है, जहां छोटे पर्दे ने न केवल मनोरंजन किया बल्कि समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम भी किया। उस दौर में कई शोज ने लोगों का मनोरंजन किया, लोगों को अलग स्तर पर जागरूक किया और धर्म का पाठ भी पढ़ाया। रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिकों ने भक्ति की लहर पैदा की थी, उसे आगे बढ़ाने में साल 1997 में आए पौराणिक शो 'जय हनुमान' का एक बड़ा योगदान रहा है। इस शो को भी 'रामायण' और 'महाभारत' जितना ही पसंद किया गया, यही वजह रही कि ये टीआरपी में भी टॉप पर रहा। इस शो में को देखने के लिए भी लोगों के बीच होड़ लगती थी।

दूरदर्शन के शोज का सामाजिक प्रभाव

90 के दशक में टेलीविजन केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले के इकट्ठा होने का एक बहाना था। खासकर रविवार की सुबह जब धार्मिक धारावाहिकों का प्रसारण होता था, तब गलियों में सन्नाटा पसर जाता था और लोग पूरी श्रद्धा के साथ टीवी के सामने बैठ जाते थे। रामायण और महाभारत की अपार सफलता के बाद दर्शकों के लिए 'जय हनुमान' लाया गया। 1997 से 2000 के बीच प्रसारित हुए इस शो ने हनुमान जी की महिमा को घर-घर तक पहुंचाया और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी का मन मोह लिया। यहीं ये भगवान हनुमान सुपरहीरो की श्रेणी में आ गए।

बाल लीलाओं से लेकर राम-भक्ति का सफर

'जय हनुमान' की कहानी भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार पवनपुत्र हनुमान के जन्म से शुरू होती है। इस धारावाहिक ने उनके जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव को बड़ी ही खूबसूरती से पर्दे पर उतारा। चाहे वह बालपन में सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश हो, अपनी शक्तियों को भूल जाने का श्राप हो या फिर प्रभु श्रीराम से उनकी ऐतिहासिक मुलाकात। लगभग 350 एपिसोड में सिमटी यह गाथा केवल हनुमान जी के पराक्रम तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें पूरी रामायण को उनके दृष्टिकोण से दिखाया गया था। माता सीता की खोज में लंका दहन, लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए संजीवनी पर्वत उठाना और रावण के अहंकार का अंत करने में उनकी भूमिका को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से फिल्माया गया था।

दिग्गज कलाकार और बेहतरीन प्रस्तुति

इस शो की सफलता के पीछे इसके कलाकारों का सजीव अभिनय था। राज प्रेमी ने हनुमान जी के युवा स्वरूप में अपनी कद-काठी और आवाज से जान फूंक दी थी, वहीं सिराज मुस्तफा खान भगवान श्रीराम के शांत अवतार में खूब जंचे। बाल हनुमान के रूप में केविन डेव की मासूमियत आज भी दर्शकों को याद है। दिलचस्प बात यह है कि इस शो में भारतीय सिनेमा के कई बड़े नाम भी जुड़े थे। मशहूर अभिनेता इरफान खान ने इसमें महर्षि वाल्मीकि की भूमिका निभाई थी, जबकि आज के सुपरस्टार रवि किशन श्रीकृष्ण के रूप में नजर आए थे। मनीष खन्ना ने लक्ष्मण के किरदार को बखूबी जिया।

कहां देखें ये शो

अपनी शानदार कहानी और सादगी भरे VFX के कारण यह शो टीआरपी की दौड़ में हमेशा शीर्ष पर रहा। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज दशकों बाद भी IMDb पर इसकी रेटिंग 8.1 है।  लोग उस दौर की यादों को ताजा करना चाहते हैं या नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से रू-ब-रू कराना चाहते हैं, वे इस शो को अमेजन प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं। यह शो आज भी हमें सिखाता है कि अटूट विश्वास और भक्ति में कितनी शक्ति होती है।

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