'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में दिखाया जाएगा कि गौतम नंदिनी से कहता है कि अगर उसे मदद चाहिए तो करण को उसके पास भेज दे। दामिनी, नंदिनी और गायत्री गौतम से कहती हैं कि यह नामुमकिन है। गौतम अपनी हालत को लेकर पक्का इरादा कर लेता है। करण गौतम से मदद मांगता है और गौतम करण से कहता है कि वह उससे ठीक से रिक्वेस्ट करें। करण बिना मन के गौतम से अपने बेटे की मदद करने की रिक्वेस्ट करता है। गौतम को करण के बर्ताव और टोन में बदलाव अजीब लगता है। यही से कहानी नया मोड़ ले लेती है।
गौतम की डिमांड
गौतम उसे उसकी फीस के बारे में याद दिलाता है। करण अपने बेटे को बचाने के लिए कुछ भी देने को तैयार हो जाता है। समीरा गौतम से कहती है कि उसमें इंसानियत की कमी है और गौतम उससे कहता है कि वह अपने पिता का रवैया देखे। गौतम करण से कहता है कि उसे 12 महीने के लिए हर महीने 4.5 लाख रुपये चाहिए। कुल मिलाकर 54 लाख बनते हैं, क्योंकि किराया देना और केस संभालना उसके लिए बहुत मुश्किल काम है। गौतम को करण से 12 पोस्ट-डेटेड चेक चाहिए। बिना किसी हिचकिचाहट के करण सभी चेक पर साइन करके उन्हें दे देता है। ऐसे में करण अपने छोटे भाई से हार मान लेता है।
वैष्णवी और नकुल ने जताई चिंता
वैष्णवी सोचती है कि रौनक 3 करोड़ के स्कैम में कैसे फंस गया। उसे यकीन नहीं होता कि मासूम रौनक इतना बुरा काम कर सकता है। वैष्णवी, नकुल को सलाह देती है कि वह अपने पिता से कहे कि इस मुश्किल समय में करण की मदद करें। नकुल को लगता है कि उनके बीच चल रहे झगड़ों और टेंशन की वजह से उसके पिता उसकी मदद नहीं करेंगे। वैष्णवी उसे बताती है कि यह सब परिवार के बारे में है और उसे उन वैल्यूज की याद दिलाती है, जो तुलसी सबको सिखाती हैं।
गौतम के आने से रौनक को लगा झटका
रौनक गौतम को अपनी जगह पर आते देखकर हैरान रह जाता है। वह गौतम को तुरंत जाने के लिए कहता है और उसकी मौजूदगी पर सवाल उठाता है। गौतम उसे ड्रामा न करने के लिए कहता है और याद दिलाता है कि अब वह उसका वकील और बचाने वाला है। गौतम रौनक को चेतावनी देता है कि वह किसी से एक शब्द भी न कहे और उसे बताता है कि उसके पिता मदद के लिए उसके पास आए थे। गौतम, करण का साइन किया हुआ चेक दिखाता है और रौनक इस घटना से पूरी तरह हैरान रह जाता है। उसने कभी उम्मीद नहीं की थी कि उसके पिता ऐसा करेंगे। रौनक, गौतम से केस में जीत का वादा करने के लिए कहता है।
करण का इमोशनल ब्रेकडाउन
करण बेबस है और वह अपना दर्द अपने खोए हुए बेटे पार्थ के साथ शेयर करता है। वह उसे मिस करता है और चाहता है कि काश वह उसे उसकी किस्मत से बचा पाता। करण पार्थ के साथ बिताए सभी पलों को याद करके फूट-फूट कर रोने लगता है। शोभा उसे दिलासा देती है और कहती है कि वह भी उसका भाई है। करण मानता है कि वह पार्थ के बिना बेबस हो गया है और अब रौनक के भविष्य को लेकर परेशान है।
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