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Explainer: ईरान-अमेरिका सीजफायर की शर्तों में लेबनान पर इजरायली हमले ने फंसाया पहला पेंच, वादे से पलटे ट्रंप; अब आगे क्या?

 Published : Apr 09, 2026 01:59 pm IST,  Updated : Apr 09, 2026 04:48 pm IST

Explainer: ईरान-अमेरिका सीजफायर में इजरायल द्वारा लेबनान पर हमले जारी रखने से पेंच फंस गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने वादे से पलट गए हैं। उनका कहना है कि इस समझौते में लेबनान शामिल नहीं था। जबकि ईरान इसे समझौते का हिस्सा बता रहा है।

लेबनान- India TV Hindi
लेबनान Image Source : PTI

ईरान और अमेरिका के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने 2 हफ्ते के सीजफायर का ऐलान तो कर दिया, लेकिन यह परवान चढ़ता नहीं दिख रहा है। मंगलवार को ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा की थी। इसमें ईरान की 10 सूत्री मांगों का भी जिक्र था। मगर इजरायल द्वारा लेबनान पर घातक हमले जारी रहने और ट्रंप द्वारा ईरान के 10 सूत्री मांगों पर सहमत नहीं होने के चलते यह समझौता लागू होने से पहले ही टूटता नजर आ रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान में हुई मौतों पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है और कहा है कि इसे विश्व देख रहा है। वहीं ट्रंप ने ईरान की 10 शर्तों को मानने वाली बात को मीडिया द्वारा फैलाया गया झूठ करार दे दिया है। इससे सीजफायर खटाई में पड़ गया है।

ट्रंप ने दी थी ईरान की सभ्यता मिटाने की धमकी

ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सभ्यता मिटाने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान नहीं माना तो “पूरी सभ्यता मर जाएगी”। मगर बाद में उन्होंने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और असीम मुनीर की ईरान पर हमले न करने की अपील का हवाला देते हुए 2 हफ्ते तक तेहरान पर हमला टालने का ऐलान किया। इस ऐलान के तहत अमेरिका और इजरायल ईरान पर हमले रोकने को तैयार हुए। इसमें ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और सुरक्षित बनाने का वादा किया है।

सीजफायर ऐलान के बाद इजरायल का लेबनान पर बड़ा हमला

ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सीजफायर का ऐलान किए जाने के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के इस फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि लेबनान और हिजबुल्लाह इस हमले में शामिल नहीं है। जबकि ईरान ने दावा किया कि लेबनान के हिजबुल्लाह, यमन के हूतिये और इराक की मिलिशिया मिलिट्री भी समझौते के बिंदुओं में शामिल है। बाद में अमेरिका ने भी लेबनान के मुद्दे को मानने से इनकार कर दिया। इजरायल ने दावा किया कि उन्हें अमेरिका द्वारा बताया गया है कि लेबनान इस समझौते में शामिल नहीं है, इसलिए इजरायल बेरूत पर हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले जारी रखेगा। इसके बाद हिजबुल्लाह ने 1 मिनट में बुधवार को बेरूत पर 160 बम बरसाये इसमें 182 मौतें हुईं। कई रिपोर्ट में 250 से अधिक मौतों का दावा किया गया है।

ईरान ने दोबारा बंद किया होर्मुज

लेबनान पर इजरायल के इस हमले को ईरान ने सीजफायर का उल्लंघन माना है। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को इस घटना के बाद ईरान ने दोबारा बंद कर दिया और जहाजों को गुजरने से रोक दिया। साथ ही ईरान ने धमकी दी कि अगर उसकी इजाजत के बगैर यहां से कोई भी जहाज गुजरा वह उसे हमले में उड़ा देगा। इसके बाद अमेरिका ने भी बयान दिया कि अगर ईरान ने समझौता नहीं माना तो दोबारा उस पर बमबारी शुरू हो जाएगी। इससे यह समझौता लागू होने से पहले भी विवादित हो गया है और अधर में पड़ गया है।

क्या थीं समझौते की प्रमुख शर्तें?

  • अमेरिका और इजरायल दो हफ्ते तक ईरान पर हमले रोकेंगे।
  • ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोल देगा और सुरक्षित रखेगा।
  • इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में शांति वार्ता होगी।
  • अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस टीम का नेतृत्व करेंगे।
  • ईरान का दावा-सीजफायर लेबनान, यमन और इराक समेत पूरे क्षेत्र पर लागू होगा।
  • पाकिस्तान ने भी शुरू में कहा कि समझौता लेबनान समेत हर जगह लागू होगा।

लेबनान पर इजरायली हमले ने फंसाया पेंच 

सीजफायर घोषित होने के कुछ घंटों बाद इजरायल ने लेबनान में भारी बमबारी शुरू कर दी। बुधवार को बेरूत समेत कई जगहों पर हमले हुए, जिसमें 180 से 250 से ज्यादा लोग मारे गए। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा- “यह सीजफायर ईरान के साथ है, जिसमें लेबनान शामिल नहीं है।” व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट और ट्रंप ने कहा कि लेबनान “अलग संघर्ष” है और सीजफायर में शामिल नहीं था। ट्रंप ने इसे अलग मसला बताया। जबकि ईरान ने इसे सीजफायर का उल्लंघन मान रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने तीन शर्तों का उल्लंघन किया है। ईरान ने जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया। इससे पूरा सीजफायर खतरे में पड़ गया।

ट्रंप का रुख बदला

ट्रंप ने शुरू में पाकिस्तान के बयान को स्वीकार करते हुए सीजफायर की घोषणा की, लेकिन कुछ घंटों बाद उन्होंने अपना रुख साफ कर दिया कि लेबनान समझौते का हिस्सा नहीं है। कई विश्लेषक इसे “वादे से पलटना” मान रहे हैं। वहीं ट्रंप का तर्क है कि ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की लड़ाई अलग मुद्दा है और अमेरिका-ईरान सीजफायर उससे ताल्लुक नहीं रखता। हालांकि ईरान का कहना है कि क्षेत्रीय शांति के बिना सीजफायर अधूरा है।

अब आगे क्या?

इस्लामाबाद वार्ता शुक्रवार यानी 10 अप्रैल से पाकिस्तान में शुरू होनी है। यह हफ्ते के सीजफायर को स्थायी बनाने का मौका है, लेकिन लेबनान का मुद्दा सबसे बड़ा रोड़ा है। क्योंकि तेहरान ने साफ कर दिया है कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे तो ईरान सीजफायर तोड़ सकता है। वहीं इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। इजरायल किसी भी समय पूर्ण युद्ध फिर शुरू कर सकता है। अब ट्रंप प्रशासन भी लेबनान के मुद्दे को समझौते से अलग रखना चाहता है, लेकिन अगर होर्मुज फिर लंबे समय के लिए बंद रहा तो तेल की कीमतें बढ़ेंगी और इसका पूरे विश्व पर असर होगा। ऐसे में सीजफायर बेहद नाजुक हो चुका है। इस सीजफायर के बाद अमेरिका और ईरान अपना-अपना दावा कर रहे हैं।

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