न्यूयॉर्क: कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी आगामी आत्मकथा के बारे में कहा कि अपने जीवन के बारे में लिखना उनके लिए आसान नहीं था क्योंकि इसके लिए उन्हें वर्षों से अपने दिल में संजोकर रखे गए अनुभवों और भावनाओं को उजागर करना पड़ा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके जीवन में गम का पहाड़ टूटने और अपनों को खोने का दर्द ही उन्हें राजनीति में लेकर आया। सोनिया गांधी की 544 पन्नों की ‘Belonging: A Journey of Love’ शीर्षक वाली आत्मकथा नवंबर में प्रकाशित होगी।
अपने जीवन के बारे में लिखना मेरे लिए आसान नहीं था
मंगलवार को न्यूयॉर्क में इस आत्मकथा के प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ की ओर से जारी एक बयान में सोनिया गांधी ने कहा, ''गम का पहाड़ टूटने और अपनों को खोने के दर्द ने मुझे राजनीति की दुनिया में ला दिया। तब तक मैं अपनी निजता की पूरी तरह रक्षा करती थी।'' उन्होंने कहा, ''अपने जीवन के बारे में लिखना मेरे लिए आसान नहीं था। इसका मतलब था ऐसी बातों और उन पलों तथा अनुभवों को साझा करना, जिन्हें मैंने हमेशा अपने दिल में संजोकर रखा था।''
एक लाख प्रतियां छपेंगी
सोनिया गांधी की इस आत्मकथा को प्रकाशन संस्था नॉफ 10 नवंबर को हार्डकवर और ई-बुक संस्करण में जारी करेगी। इसका ऑडियो संस्करण भी प्रकाशित किया जाएगा। प्रकाशक की ओर से बताया कि पुस्तक की पहली एक लाख प्रतियों की छपाई की घोषणा की गई है। इस प्रकाशन संस्था का हेडक्वार्टर न्यूयॉर्क में स्थित है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि वह चाहती हैं कि यह पुस्तक उनके जीवन में आयी ''खुशियों और गहरी निराशा से भरी उनकी भावनात्मक यात्रा का प्रमाण बने।''
उन्होंने कहा, ''मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम विवरण ऐसे रहे हैं जो उनके फैसलों के पीछे की वास्तविक भावनाओं और वजहों, उनके कार्यों और उनकी बेहद मानवीय कमजोरियों की सच्चाई तक पहुंच पाए हों।'' उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ''कई मायनों में'' उनके परिवार की ''मानवीयता'' को समर्पित है।
बचपन से लेकर अब तक का वर्णन
इस आत्मकथा में सोनिया गांधी के इटली में बिताए बचपन से लेकर भारत में उनके जीवन तक का वर्णन किया गया है। राजीव गांधी से विवाह, देश की प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी की बहू बनना, इन सबका उल्लेख इस आत्मकथा में किया गया है। सोनिया ने कहा कि राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने के बाद जब उन्होंने अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें एहसास हुआ कि ''उनके जीवन के हर पड़ाव को जोड़ने वाली कड़ी प्रेम और निष्ठा रही है।'' उन्होंने अपनी इस यात्रा को ''इटली के छोटे शहर में अपने बचपन की सरलता से लेकर भारत में बिताए वर्षों की जटिलता'' तक की यात्रा बताया।
जब राजीव गांधी से पहली नजर में हुआ प्यार
इस आत्मकथा की शुरुआत वर्ष 1965 इंग्लैंड के कैंब्रिज से होती है। यहां 19 साल की छात्रा सोनिया माइनो को राजीव गांधी से पहली ही नजर में प्यार हो गया और बाद में दोनों ने शादी कर ली। इस किताब में इंदिरा गांधी से उनकी पहली मुलाकात, हिंदी सीखने की उनकी कोशिश, साड़ी पहनना और भारतीय व्यंजनों का आनंद लेना तथा गांधी परिवार पर आए दुखों के पहाड़ का भी जिक्र है। राजीव गांधी के छोटे भाई संजय गांधी की विमान हादसे में मौत के बाद 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई। मां की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने और इसके सात साल बाद चुनाव प्रचार के दौरान उनकी भी हत्या कर दी गई।
कई साल तक राजनीति में आने के दबाव को टाला
आत्मकथा में यह भी बताया गया है कि कई साल तक राजनीति में आने के दबाव को टालने के बाद उन्होंने आखिरकार सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके अलावा, 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से उनके इनकार का भी उल्लेख है। सोनिया गांधी ने कहा कि उनकी कहानी पाठकों को भारत में पिछले छह दशकों के दौरान हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को देखने का एक अनूठा नजरिया भी देती है। उन्होंने भारत को ''खूबसूरत देश'' बताया, जिसे वह ''अपना मानती'' हैं।
हाल ही में सोनिया गांधी के वायरल वीडियो पर बहस छिड़ी थी, जिसको लेकर ये सवाल खड़े हुए थे कि क्या स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस ने राष्ट्रगीत का अपमान किया?
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