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Explainer: ओबामा की डील रद्द करके ट्रंप ने आखिर कौन सा तीर मारा? जानें US-Iran समझौते का चौंकाने वाला सच

 Written By: Hussain Rizvi Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Jun 16, 2026 02:45 pm IST,  Updated : Jun 16, 2026 02:52 pm IST

108 दिन के खून खराबे के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म हो गया है। दोनों देशों के बीच के शांति समझौते की लगभग सभी शर्तें भी दुनिया के सामने आ चुकी हैं। लेकिन बहुत से एक्सपर्ट्स पूछ रहे हैं कि यही समझौता करना था तो ईरान के साथ जंग करने की क्या जरूरत थी।

donald trump barack obama- India TV Hindi
डोनाल्ड ट्रंप, बराक ओबामा। Image Source : AP (FILE PHOTO)

अमेरिका और ईरान एक शांति समझौते पर राज़ी हो गए हैं जिसके तहत मध्य पूर्व में लेबनान समेत सभी फ्रंट पर तुरंत युद्ध बंद करने पर सहमति बनी है। शांति समझौते की लगभग सभी शर्तें भी दुनिया के सामने आ चुकी हैं जिसमें सबसे अहम ईरान को परमाणु हथियार न हासिल करने देने की शर्त शामिल है और दुनिया की सप्लाई चेन की दुख्ती रग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी तुरंत सबके लिए खोल दिया जाएगा। स्विट्जरलैंड में 19 जून को MoU पर दस्तखत होते ही  ये समझौता अमल में आ जाएगा। लेकिन जानकार एक सवाल का जवाब तलाश करने में लगे हैं कि ओबामा के JCPOA  को रद्द करने के बाद ट्रंप कौन सा तीर मारा है? आइए जानते हैं ओबामा से लेकर ट्रंप तक, ईरान डील का पूरा इतिहास-

अमेरिका-ईरान डील की कहानी कहां से शुरू हुई?

ये कहानी 2002 से शुरू होती है जब दुनिया को पहली बार इस बात की खबर मिली कि ईरान परमाणु कार्यक्रम पर काम कर रहा है। अमेरिका को पता चला कि ईरान नतांज और अरक में परमाणु कार्यक्रम चला रहा है मतलब ईरान भविष्य में परमाणु बम हासिल कर सकता है। फिर क्या था... ईरान पर अमेरिका यूरोप और IAEA का दबाव बढ़ने लगा। 2006 के बाद संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और यूरोप ने ईरान कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए। इन प्रतिबंधों की वजह से ईरान का तेल और बैंकिंग सेक्टर बड़े संकट में घिर गया फिर ईरान इन प्रतिबंधों से बचने के रास्ते तलाश करने में लग गया।

ओबामा का दौर और 2015 की वो डील

अमेरिका में 2009 में रिपब्लिकन जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बाद डेमोक्रेट बराक ओबामा राष्ट्रपति चुने गए। ओबामा का मानना था कि प्रतिबंध या जंग किसी समस्या का हल नहीं हो सकते। 2012-2013 में ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान की गुप्त बातचीत की शुरुआत हुई। उस वक्त में ईरान में डॉ. हसन रूहानी की सरकार थी और रूहानी भी पश्चिम के साथ किसी समझौते के हक में थे। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही गुप्त बातचीत ने औपचारिक बातचीत के लिए पुल तैयार कर दिया और इस तरह JCPOA की ज़मीन तैयार होने लगी। 2013 में दोनों देश एक अंतरिम समझौते पर पहुंच गए और इसके बाद करीब 2 साल तक अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन जर्मनी, रूस, चीन और ईरान के बीच बातचीत चलती रही। आखिरकार 2015 में JCPOA पर साइन हुआ।

barack obama
Image Source : APबराक ओबामा

JCPOA के अहम प्वाइंट्स-

  • ओबामा ने ईरान का यूरेनियम एनरिचमेंट 3.67 फीसद तक सीमित किया।
  • एनरिच यूरेनियम भंडार 300 किग्रा तक सीमित किया।
  • हज़ारों की संख्या में सेंट्रीफ्यूज़ हटाए गए।
  • IAEA को बड़े पैमाने पर निरीक्षण का अधिकार मिला।
  • इसके बदले में अमेरिका यूरोप और संयुक्त राष्ट्र ने ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों से राहत दी।

ट्रंप का पहला कार्यकाल

2009 में शुरू हुआ डेमोक्रेट ओबामा का दूसरा कार्यकाल 2017 में खत्म हो रहा था। 2016 के आखिर में चुनाव प्रचार के वक्त से ही रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ओबामा की डील को बैड डील या वन साइडेड डील कहते चले आ रहे थे। फिर डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2017 में अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली और अगले ही बरस मई 2018 में उन्होंने अमेरिका को JCPOA से बाहर निकाल लिया।

ट्रंप के JCPOA से बाहर निकलने के लिए क्या दलील दी?

  1. ट्रंप को लग रहा था कि ओबामा की डील में कुछ प्रतिबंध 15 साल बाद खत्म होने हैं मतलब डील स्थायी नहीं है।
  2. ट्रंप की दलील थी कि इससे ईरान भविष्य में फिर से परमाणु बम बनाने की तरफ बढ़ सकता है।
  3. ट्रंप का मानना था कि ओबामा की डील सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित थी जबकि वो ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को इसमें शामिल करना चाहते थे।
  4. ओबामा की डील में ईरान की क्षेत्रीय एक्टिविटीज़ को शामिल नहीं किया गया था जिसमें हिज़बुल्लाह, हूती और दूसरे शिया मिलीशिया को सपोर्ट करना आता है।
  5. ट्रंप का तब मानना था कि ईरान को प्रतिबंधों से राहत देने का मतलब ईरान को और मज़बूत करना होगा और इससे मध्य पूर्व में साथी गुट भी मज़बूत होंगे।
  6. ट्रंप का मानना था कि ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाकर उसे और बेहतर व्यापक समझौते के लिए मजबूर किया जा सकता है।
  7. इन सभी कारणों से ट्रंप ने ओबामा की 2015 वाली डील को खारिज कर दिया था।

ट्रंप का दूसरा कार्यकाल

डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार 2025 में फिर से सत्ता में लौटे। अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर अपना कामकाज शुरू किया। इस बार ट्रंप मागा के नारे के साथ वापस आए थे। ईरान के साथ 19 जून को साइन होने वाले शांति समझौते को मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के एंगल से ही पेश किया जा रहा है।

ओबामा vs ट्रंप: ईरान के साथ दो डील, क्या फर्क है और कौन सी बेहतर?

  • ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने देना नहीं चाहते तो ईरान ने भी परमाणु बम न बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराया है।
  • ट्रंप ने यूरेनियम एनरिचमेंट को लेकर ईरान को बाध्य किया है लेकिन पिक्चर अभी क्लियर नहीं है।
  • ट्रंप ने होर्मुज के खुलने का रास्ता तैयार किया है तो ओबामा के वक्त में भी होर्मुज बंद नहीं था।
  • जानकारों का मानना है कि ओबामा की डील ट्रंप की डील के मुकाबले कहीं ज्यादा स्पष्ट थी जिसमें परमाणु कार्यक्रम निगरानी का बेहतर और व्यापक इंतज़ाम था।
  • ट्रंप ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय ग्रुप्स के मुद्दे को समझौते में शामिल करने में नाकाम रहे, जिसे लेकर ट्रंप ओबामा को कोसते रहे हैं।

बहुत से एक्सपर्ट्स पूछ रहे हैं कि यही समझौता करना था तो  ईरान के साथ जंग करने की क्या ज़रूरत थी।

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