1. Hindi News
  2. Explainers
  3. सड़क पार करते समय हादसा हुआ तो किसकी गलती? पैदल यात्री और ड्राइवर के अधिकार समझें

सड़क पार करते समय हादसा हुआ तो किसकी गलती? पैदल यात्री और ड्राइवर के अधिकार समझें

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Sep 25, 2026 10:28 am IST,  Updated : Sep 25, 2026 10:50 am IST

सड़क पार करते समय हादसे में हमेशा पैदल यात्री या ड्राइवर को ही दोषी नहीं माना जाता। हादसे की परिस्थितियों, ट्रैफिक नियमों, वाहन की रफ्तार, पैदल यात्री की स्थिति और चालक की लापरवाही जैसे तथ्यों के आधार पर ही कानून जिम्मेदारी तय करता है।

भारत में सड़क पार करते...- India TV Hindi
भारत में सड़क पार करते हुए हर साल हजारों पैदल यात्रियों की जान जाती है। Image Source : INDIA TV

Highlights

  • सड़क पार करते समय हादसे में पैदल यात्री और ड्राइवर, दोनों की भूमिका जांची जाती है।
  • जेब्रा क्रॉसिंग पर ड्राइवर को पैदल यात्री की सुरक्षा का खास ध्यान रखना होता है।
  • लापरवाही से मौत होने पर कानूनी कार्रवाई के साथ मुआवजे का भी प्रावधान है।

Pedestrian Road Accident Rules: दिल्ली में गुरुवार को सड़क हादसे में 55 साल की एक महिला की जान चली गई। पुलिस ने बताया कि खजूरी फ्लाईओवर के पास सड़क पार करते समय एक मोटरसाइकिल ने उन्हें टक्कर मार दी जिसके बाद वह एक ट्रक की चपेट में आ गईं और उनकी जान चली गई। आपने ऐसी ही कई खबरें पढ़ी होंगी जहां पैदल सड़क पार करते वक्त लोग गाड़ी की चपेट में आ गए और अपनी जान गंवा बैठे। दरअसल, सड़क पर चलते समय सबसे ज्यादा जोखिम पैदल यात्रियों को रहता है और कई बार उनके साथ गंभीर हादसा हो जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर सवाल उठता है कि गलती किसकी मानी जाएगी, पैदल यात्री की या वाहन चालक की? आइए, समझते हैं।

पैदल यात्री के लिए क्या कहते हैं नियम?

2017 में आए मोटर व्हीकल्स (ड्राइविंग) रेगुलेशन्स में पैदल यात्रियों को सड़क का जरूरी हिस्सा माना गया है। इन नियमों के मुताबिक, ड्राइवर और गाड़ी में बैठे लोगों को पैदल यात्रियों, साइकिल चलाने वालों, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों की सुरक्षा का खास ध्यान रखना चाहिए। खासकर ऐसी जगह जहां पैदल यात्री सड़क पार कर रहे हों और वहां कोई ट्रैफिक सिग्नल न हो, तो वहां पहुंचते समय वाहन चालक को गाड़ी की रफ्तार कम करनी चाहिए।

Pedestrian Road Accident Rules, Pedestrian Rights India
Image Source : INDIA TVपैदल यात्री सड़क पार कर रहा हो तो ड्राइवर को क्या करना चाहिए?

सिर्फ इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर गाड़ी रोकनी चाहिए और पैदल यात्री को पहले सड़क पार करने का मौका देना चाहिए। इसी तरह, अगर सड़क के किनारे पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ या साइकिल चलाने वालों के लिए अलग रास्ता बना हुआ है, तो वहां वाहन नहीं चलाया जा सकता। ऐसा सिर्फ तब किया जा सकता है, जब पुलिस अधिकारी इसकी इजाजत दें या वहां लगे ट्रैफिक सिग्नल से इसकी अनुमति मिलती हो।

जेब्रा क्रॉसिंग पर ड्राइवर की जिम्मेदारी क्या है?

जेब्रा या पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग पैदल चल रहे लोगों के सड़क पार करने के लिए बनाया जाता है। नियमों के मुताबिक, वाहन चालक को पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग के पास खास सावधानी रखनी होती है। ट्रैफिक सिग्नल पर भी वाहन को पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग से पहले रुकना होता है। अगर हरी बत्ती होने के बावजूद कोई पैदल यात्री पहले से इंटरसेक्शन या संबंधित पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग पर मौजूद है, तो ड्राइवर को उसे रास्ता देना होता है। हादसे के समय पैदल यात्री कहां था और गाड़ी किस तरह चलाई जा रही थी, ये बातें भी महत्वपूर्ण होती हैं।

गलत जगह से सड़क पार करने पर किसकी गलती?

सड़क हादसे के बाद सिर्फ यह देखकर फैसला नहीं किया जाता कि पैदल यात्री सड़क कहां से पार कर रहा था। जांच में कई बातों को देखा जाता है। जैसे वह व्यक्ति किस जगह से सड़क पार कर रहा था, वहां पैदल यात्रियों के लिए रास्ता या सिग्नल बना था या नहीं, वाहन कितनी तेज रफ्तार से आ रहा था और चालक के पास हादसा रोकने या वाहन को संभालने का पर्याप्त समय था या नहीं।

Pedestrian Road Accident Rules, Pedestrian Rights India
Image Source : INDIA TVसड़क हादसा होने पर गलती कैसे तय की जाती है?

इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि अगर हादसे में सिर्फ वाहन चालक की ही नहीं, बल्कि किसी हद तक पीड़ित की भी लापरवाही सामने आती है, तो अदालत पूरे मामले के तथ्यों को देखकर जिम्मेदारी तय कर सकती है। इसलिए हर सड़क हादसे में पहले से यह तय नहीं माना जा सकता कि गलती केवल ड्राइवर की थी या केवल पैदल यात्री की। जेब्रा क्रॉसिंग जैसी जगहों पर वाहन चालक की सावधानी हादसे की जांच में एक महत्वपूर्ण बात हो सकती है।

ड्राइवर की लापरवाही पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

अगर जांच में पता चलता है कि ड्राइवर ने लापरवाही से या तेज और खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाई, जिससे किसी की जान को खतरा हुआ या किसी को चोट लग सकती थी, तो BNS की धारा 281 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इस धारा में सड़क पर लापरवाही से गाड़ी चलाना अपराध माना गया है। अगर किसी व्यक्ति की मौत वाहन चालक की लापरवाही के कारण होती है और मामला गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता, तो BNS की धारा 106(1) के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें 5 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

ऐसे हादसे के बाद ड्राइवर को क्या करना चाहिए?

मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 134 के तहत हादसे में किसी व्यक्ति को चोट लगने या संपत्ति को नुकसान होने पर ड्राइवर या वाहन के प्रभारी व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह घायल को जल्द से जल्द इलाज दिलाने के लिए उचित कदम उठाए और जरूरत पड़ने पर उसे नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल पहुंचाए। साथ ही पुलिस को मांगी गई जानकारी देनी होती है और घटना की जानकारी जल्द से जल्द, अधिकतम 24 घंटे के भीतर, नजदीकी पुलिस स्टेशन को देनी होती है।

Pedestrian Road Accident Rules, Pedestrian Rights India
Image Source : INDIA TVसड़क हादसा हो जाए तो ड्राइवर की क्या जिम्मेदारी होती है?

पीड़ित परिवार को मुआवजा कैसे मिल सकता है?

मोटर व्हीकल्स एक्ट में सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए मुआवजे का भी प्रावधान है। धारा 164 के तहत वाहन के इस्तेमाल से हुए हादसे में मौत होने पर कानूनी वारिसों को 5 लाख रुपये और गंभीर चोट के मामले में 2.5 लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है। इस प्रावधान के तहत दावा करने वाले को वाहन मालिक या वाहन से जुड़ी गलती साबित करना जरूरी नहीं है। इसके अलावा मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण यानी MACT के जरिए भी सड़क हादसे में मौत या चोट से जुड़े मुआवजे के दावे किए जा सकते हैं। मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 165 ऐसे ट्रिब्यूनल्स के गठन का प्रावधान करती है।

तो कौन होता है दोषी, पैदल यात्री या ड्राइवर?

ऐसे में देखा जाए तो सड़क पार करते समय हादसा होने पर यह कहना सही नहीं है कि हमेशा पैदल यात्री दोषी होगा या ड्राइवर का कसूर होगा। कानून दोनों पक्षों के व्यवहार और हादसे की परिस्थितियों को देखता है। पैदल यात्री को सुरक्षित तरीके से सड़क पार करनी चाहिए, जबकि गाड़ी के ड्राइवर पर सड़क पर चल रहे लोगों की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी की जिम्मेदारी है। इस तरह के सड़क हादसों में फैसला घटनास्थल के सबूत, ट्रैफिक नियमों और पूरे घटनाक्रम की जांच के आधार पर सुनाया जाता है।

ये भी पढ़ें: जन्म और मृत्यु पंजीकरण के सख्त हो गए हैं नियम, जान लें पूरी बात, नहीं तो होगी परेशानी

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Explainers से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।