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क्या है SIM बाइंडिंग, जिसे लेकर DoT है सख्त? सोशल मीडिया यूजर्स की प्राइवेसी रहेगी सुरक्षित

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Apr 03, 2026 06:41 pm IST,  Updated : Apr 03, 2026 06:43 pm IST

दूरसंचार विभाग सिम बाइंडिंग को लेकर सख्त है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इसे लागू करने के लिए दिसंबर तक की मोहलत दी गई है। सिम बाइंडिंग की वजह से बड़े पैमाने पर साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिल सकती है।

What is SIM Binding- India TV Hindi
क्या है सिम बाइंडिंग? Image Source : FREEPIK

DoT यानी दूरसंचार विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप्स को बड़ी राहत देते हुए सिम बाइंडिंग रोल आउट करने के लिए डेडलाइन को एक्सटेंड कर दिया है। WhatsApp, Telegram, Signal, Facebook जैसे प्लेटफॉर्म्स अब इसे दिसंबर 2026 तक लागू कर सकते हैं। पहले इन कंपनियों को 28 फरवरी तक का समय दिया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 31 मार्च किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इसके लिए 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है।

क्या है सिम बाइंडिंग?

सिम बाइंडिंग एक ऐसी सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें WhatsApp, Telegram, Signal समेत तमाम सोशल मीडिया ऐप्स उसी डिवाइस में काम करेंगे, जिसमें सिम लगा होगा। इसका मतलब है कि यूजर्स सिम किसी और डिवाइस में और वॉट्सऐप किसी और फोन में इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। यह प्राइवेसी के लिए सरकार द्वारा उठाया गया एक ठोस कदम है। पिछले दिनों केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि सिम बाइंडिंग नियम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।

SIM Binding
Image Source : UNSPLASHसिम बाइंडिंग

साइबर फ्रॉड को रोकने में होगी मदद

दूरसंचार विभाग एवं अन्य स्टेकहोल्डर्स का मानना है कि सिम बाइंडिंग शुरू होने से साइबर फ्रॉड को रोकने में मदद मिल सकेगी। उदाहरण के तौर पर ऐसे कई लोग हैं, जो अपने वॉट्सऐप अकाउंट वाले मोबाइल नंबर का सिम कार्ड किसी और मोबाइल में यूज कर रहे हैं और अकाउंट किसी दूसरे डिवाइस में इस्तेमाल कर रहे हैं।

सिम बाइंडिंग लागू होने के बाद यूजर्स ऐसा नहीं कर पाएंगे। जिस डिवाइस में सिम कार्ड मौजूद होगा, उसी डिवाइस में वॉट्सऐप लॉग-इन कर पाएंगे। ऐसा केवल वॉट्सऐप के लिए नहीं होगा, अन्य इंस्टैंट मैसेजिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए भी यही नियम रहेगा। यह ठीक उसी तरह काम करेगा, जैसे बैंकिंग ऐप्स और UPI ऐप्स काम करते हैं, जो पूरी तरह से सिक्योर होगा।

लागू करने में क्यों हो रही देरी?

दूरसंचार विभाग ने पिछले साल नवंबर में ही सिम बाइंडिंग से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी किया था और वॉट्सऐप, टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स को अगले 90 दिनों में इसे रोल आउट करने का निर्देश दिया था। हालांकि, आदेश के 90 दिनों के बाद भी इसे लागू नहीं किया जा सका। बाद में इसकी डेडलाइन अगले 30 दिनों के लिए बढ़ा दी गई, फिर भी यह लागू नहीं हो सका।

WhatsApp
Image Source : FREEPIKवॉट्सऐप

Meta, telegram जैसे सोशल मीडिया और इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का मानना है कि यह एक जटिल तकनीकी व्यवस्था है, जिसकी वजह से इसे लागू करने में समय लग सकता है। इसके लिए ऐप्स के इंटरनल सॉफ्टवेयर में कई तरह के बदलाव किए जाने की जरूरत होगी। वहीं, Android और iOS ऑपरेटिंग सिस्टम डिजाइन करने वाली कंपनियों को भी इसके लिए OS के फीचर्स में बदलाव की जरूरत होगी। इसकी टेस्टिंग के साथ-साथ R&D में और समय लगने की संभावना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया और इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स इसके लिए DoT के साथ मिलकर काम कर रही है। फिलहाल कई ऐप्स इसकी इंटरनल टेस्टिंग कर रहे हैं। बाद में इसका पब्लिक बीटा जारी किया जाएगा।

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