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Explainer: US-ईरान युद्ध का दूसरा दौर कितना खतरनाक? जानें दुनिया पर इसका क्या हो सकता है असर

 Published : Jun 11, 2026 05:12 pm IST,  Updated : Jun 11, 2026 06:25 pm IST

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष वैश्विक चिंता का कारण बन गया है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में तनाव से तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है। इससे महंगाई, ईंधन संकट और आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है।

अमेरिका और ईरान के बीच...- India TV Hindi
अमेरिका और ईरान के बीच जंग का दूसरा राउंड शुरू हो गया है। Image Source : INDIA TV

Round 2 of US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जंग एक बार फिर तेज हो गई है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ सीजफायर टूटने के बाद दोनों देशों के बीच फिर से भारी लड़ाई शुरू हो गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जंग का यह नया फेज पहले से ज्यादा गंभीर हो सकता है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। फरवरी में शुरू हुए युद्ध के पहले चरण में दोनों पक्ष मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बना रहे थे। लेकिन अब लड़ाई एक ऐसे दौर में पहुंचती दिख रही है, जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले हो रहे हैं।

अमेरिका-ईरान के बीच जंग से परेशान क्यों है दुनिया?

अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई गंभीर होती जा रही है और इसके चलते दुनिया के देशों को सबसे बड़ी चिंता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर है। ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद रखने का रुख अपनाया है। दूसरी ओर, अमेरिका ने समुद्री मार्गों पर कड़ी नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है।

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Image Source : INDIA TVदोनों देशों के बीच जंग के दूसरे राउंड ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक बाधित हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है, वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आ सकती है। साथ ही कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो सकता है और तेल आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा नुकसान हो सकता है।

'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है?

अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में सख्त समुद्री नाकेबंदी लागू किए जाने के बाद ओमान के तट के पास मौजूद महत्वपूर्ण जहाजरानी मार्ग खतरनाक क्षेत्र बन गए हैं। हाल के दिनों में 3 व्यापारिक जहाजों पर लगातार मिसाइल हमले हुए हैं। इन घटनाओं में भारतीय चालक दल के कुछ सदस्यों की भी जान गई है।

अमेरिका का कहना है कि उसके हवाई हमलों का उद्देश्य केवल उन जहाजों को रोकना है जो प्रतिबंधित गंतव्यों की ओर जा रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में जहाजों के इंजन वाले हिस्सों को निशाना बनाया जाता है ताकि जहाज आगे न बढ़ सकें। लेकिन तटस्थ बंदरगाहों के नजदीक हुई इन घटनाओं और जान-माल के नुकसान ने गंभीर कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

इससे कई बेहद जरूरी सवाल उठ रहे हैं:

  1. क्या अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर इस तरह की कार्रवाई कानूनी रूप से उचित है?
  2. जिन जहाजों पर प्रतिबंध नहीं है, उन्हें निशाना बनाने का क्या आधार है?
  3. भू-राजनीतिक संघर्ष के बीच फंसे निर्दोष नाविकों की सुरक्षा क्यों नहीं हो सकी?

शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधाएं क्या हैं?

सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि ईरान के साथ किसी समझौते की संभावना बन सकती है। लेकिन हालिया हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने इस संभावना को कमजोर कर दिया है। दोनों देशों के बीच कई बड़े मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने 'एनरिच्ड यूरेनियम' के भंडार को छोड़ दे। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि यह यूरेनियम तकनीकी रूप से हथियार-ग्रेड सामग्री के काफी करीब है। वहीं, ईरान यूरेनियम का भंडार छोड़ने को तैयार नहीं है। साथ ही वह अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है। ईरान यह भी चाहता है कि अंतिम समझौते से पहले ही उसकी फ्रीज की गई विदेशी संपत्तियों को मुक्त किया जाए। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है।

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Image Source : APईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर बंद कर दिया है।

इजरायल और हिजबुल्लाह का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?

ईरान का कहना है कि युद्ध समाप्त करने वाले किसी भी समझौते में उसके सहयोगी संगठन हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच लड़ाई को भी खत्म किया जाना चाहिए। लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू फिलहाल हिजबुल्लाह को पूरी तरह कमजोर या नष्ट करने के अपने लक्ष्य पर कायम दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि इस मुद्दे पर भी सहमति बनना मुश्किल नजर आ रहा है।

दोनों के बीच मध्यस्थता की कोशिशें कहां तक पहुंचीं?

अमेरिका के साथ समन्वय में काम कर रहा कतर का एक कूटनीतिक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में तेहरान पहुंचा था। अधिकारियों के अनुसार, बातचीत के बाद यह प्रतिनिधिमंडल गुरुवार सुबह तेहरान से लौट गया। हालांकि अभी तक किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई है। वहीं पाकिस्तान ने बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है और अमेरिका तथा ईरान दोनों से युद्धविराम का पालन करने की अपील की है।

अमेरिका-ईरान की जंग में आगे क्या हो सकता है?

यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष लंबा खिंचता है और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जाम रहता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल, गैस, महंगाई, वैश्विक व्यापार और वित्तीय बाजारों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं और युद्धविराम बहाल हो जाता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभावित बड़े झटके से बचाया जा सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें शांति वार्ताओं और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर टिकी हुई हैं।

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