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सोना उगल रहा है यह ज्वालामुखी, इससे आगे की बात जानकर तो आप हो जाएंगे हैरान

Published : Oct 28, 2024 04:13 pm IST,  Updated : Oct 28, 2024 04:13 pm IST
दुनिया में एक ज्वालामुखी ऐसा भी है जो रोजाना लाखों रुपये का सोना उगल रहा है। भले ही यह ज्वालामुखी सोना उगल रहा है लेकिन इसे पाना लगभग नामुमकिन है। तो चलिए आपको बताते हैं कि या ज्वालामुखी है कहां और इसका नाम क्या है।
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दुनिया में एक ज्वालामुखी ऐसा भी है जो रोजाना लाखों रुपये का सोना उगल रहा है। भले ही यह ज्वालामुखी सोना उगल रहा है लेकिन इसे पाना लगभग नामुमकिन है। तो चलिए आपको बताते हैं कि या ज्वालामुखी है कहां और इसका नाम क्या है।
अंटार्कटिका के 138 सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक माउंट एरेबस रोजाना लाखों रुपये का सोना उगल रहा है। इस ज्वालामुखी से रोजाना निकलने वाली धूल में सोने के कण पाए गए हैं। ज्वालामुखी से रोजाना निकलने वाले सोने की कीमत 5 लाख रुपये से ज्यादा आंकी गई है।
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अंटार्कटिका के 138 सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक माउंट एरेबस रोजाना लाखों रुपये का सोना उगल रहा है। इस ज्वालामुखी से रोजाना निकलने वाली धूल में सोने के कण पाए गए हैं। ज्वालामुखी से रोजाना निकलने वाले सोने की कीमत 5 लाख रुपये से ज्यादा आंकी गई है।
न्यूयॉर्क पोस्ट ने आईएफएल साइंस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि नासा के वैज्ञानिकों ने ज्वालामुखी की धूल का विश्लेषण कर सोना पाए जाने की पुष्टि की है।
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न्यूयॉर्क पोस्ट ने आईएफएल साइंस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि नासा के वैज्ञानिकों ने ज्वालामुखी की धूल का विश्लेषण कर सोना पाए जाने की पुष्टि की है।
रिपोर्ट में कहा है कि ज्वालामुखी से निकलने वाली इस धूल में रोजना करीब 80 ग्राम क्रिस्टलीकृत सोने का पता लगाया है। माउंट एरेबस अंटार्कटिका के डिसेप्शन द्वीप में स्थित है, जो इस क्षेत्र के दो सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।
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रिपोर्ट में कहा है कि ज्वालामुखी से निकलने वाली इस धूल में रोजना करीब 80 ग्राम क्रिस्टलीकृत सोने का पता लगाया है। माउंट एरेबस अंटार्कटिका के डिसेप्शन द्वीप में स्थित है, जो इस क्षेत्र के दो सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि माउंट एरेबस ज्वालामुखी से निकलने वाली धूल को एकत्र करना या आगे की जांच करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि पहाड़ तक आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता है।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि माउंट एरेबस ज्वालामुखी से निकलने वाली धूल को एकत्र करना या आगे की जांच करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि पहाड़ तक आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता है।
कोलंबिया विश्वविद्यालय में लैमोंट-डोहर्टी अर्थ ऑब्ज़र्वेटरी के कॉनर बेकन के अनुसार, एरेबस में 1972 से लगातार विस्फोट हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह पर्वत 'लावा झील' के लिए भी जाना जाता है।
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कोलंबिया विश्वविद्यालय में लैमोंट-डोहर्टी अर्थ ऑब्ज़र्वेटरी के कॉनर बेकन के अनुसार, एरेबस में 1972 से लगातार विस्फोट हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह पर्वत 'लावा झील' के लिए भी जाना जाता है।
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