मुंबई: मुंबई से 50 किलोमीटर दूर स्थित पनवेल से 22 वर्षीय प्रिसिलिया मदान ने जब अपनी साइकिल से यात्रा शुरू की तब वह इस बात को लेकर आश्वस्त थीं कि महीनों का प्रशिक्षण उन्हें खुद के बलबूते कन्याकुमारी तक के उनके पड़ाव तक पहुंचाने में मदद करेगा।
बहरहाल, हर दिन के साथ सटीक यात्रा कार्यक्रम और हर दिन की यात्रा के बाद कहां रूका जाए इसकी योजना छूटती चली गई। शहर के एक कॉलेज में मास्टर्स इन कम्प्यूटर साइंस की छात्रा प्रिसिलिया के दिमाग में सिर्फ दूरी और सड़कों का उतार चढ़ाव ही अंकित था। अपनी 1800 किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान होटलों के बजाय लोगों के घर में 18 रातें गुजारकर प्रिसिलिया आज शाम देश के दक्षिण छोर पर पहुंचीं।
प्रिसिलिया ने बताया, ‘सड़क पर मैंने खुद को कभी भी अकेला या असुरक्षित महसूस नहीं किया। लोग मेरे पास आते और वे मेरी यात्रा के बारे जानना चाहते और कई बार उन्होंने मुझसे अपने घर चलने का अनुरोध किया और घर की महिलाओं को भी प्रेरित किया।’