नई दिल्ली: बौनेपन से प्रभावित 44 वर्षीय एक व्यक्ति का शहर के एक अस्पताल के चिकित्सकों ने सबसे छोटे हिप कप को इंप्लांट करने के लिए दुर्लभ ऑपरेशन किया है। इसने बिना दर्द के उसे निर्बाध चलने में सक्षम बनाया है। पिछले तकरीबन 10 वर्षों से दीप प्रधान बौनेपन से जुड़े दुर्लभ विकार के प्रभावों से पीडि़त थे। इसे हिप डिसप्लेसिया या नितंब के जोड़ का गलत एलाइनमेंट कहा जाता है। जब दर्द को सहना असहनीय हो गया तो सिक्किम में गंगटोक के रहने वाले इलेक्टि्रकल इंजीनियर ने इलाज के लिए दिल्ली की यात्रा करने का फैसला किया।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपीडिक एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. राजीव के शर्मा ने कहा, चार फुट तीन इंच के प्रधान बौनेपन से पीडि़त हैं। इस दशा ने उन्हें इस विकार से आसानी से प्रभावित होने वाला बनाया। छोटे कद के मरीज हड्डी संबंधी विकारों यथा डिस्प्लेसिया या डिजिनरेटिव हिप बीमारी और गठिया से ग्रस्त होने के उन्मुख होते हैं। ऐसा विकार के विकसित होने और असामान्य भार वितरण की वजह से होता है। उन्होंने कहा, प्रधान को काफी दर्द हो रहा था और उनके लिए चलना काफी मुश्किल था। संपूर्ण हिप रिप्लेसमेंट एकमात्र समाधान था। हालांकि, इसने एक और चुनौती पेश की क्योंकि मरीज का एसीटाबुलम या हिप कप बहुत छोटा था।
प्रधान चूंकि सिर्फ 44 साल के हैं इसलिए चिकित्सकों ने इस बात को सुनिश्चित करना चाहा कि उनके लिए इस्तेमाल किया जाने वाला इंप्लांट कुछ दशक तक चले ताकि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें प्रॉसथेसिस के घिसने की वजह से दोबारा सर्जरी नहीं करानी पड़े। शर्मा ने कहा, हिप रिप्लेसमेंट वृद्ध मरीजों में आम तौर पर किया जाता है, जो फ्रैक्चर या हड्डी के खिसकने से पीडि़त होते हैं। वृद्ध मरीजों में 15 साल चलने वाले अक्सर जीवनकाल के लिए पर्याप्त होते हैं। हालांकि, दीप जैसे मरीज में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट---नितंब या घुटना---का ऑपरेशन अपने आप में एक चुनौती थी क्योंकि एक युवा मरीज आसानी से कृत्रिम प्रॉसथेसिस के सामान्य काल से अधिक समय तक जीवित रह सकता है। शर्मा ने कहा, इसलिए हमें सावधानीपूर्वक प्रक्रिया के लिए इंप्लांट को चुनना पड़ा। चिकित्सकों ने डेल्टा मोशन सेरामिक-ऑन-सेरामिक टोटल हिप रिप्लेसमेंट इंप्लांट का इस्तेमाल किया जिसका विशेष तौर पर युवा मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जाता क्योंकि यह अधिक समय तक टिकता है।
प्रधान के लिए सबसे छोटे उपलब्ध हिप प्रॉस्थेसिस (42 मिमी) का इस्तेमाल किया गया ताकि नितंब जोड़ के साथ सर्वश्रेष्ठ समावेश को हासिल किया जा सके। चिकित्सकों ने एक विशेष सेरामिक मोनोब्लॉक इंप्लांट का इस्तेमाल भी किया जिसका टिकाउपन अधिक है और करीब 40 साल तक रह सकता है। अपनी सर्जरी के कुछ ही दिनों के भीतर प्रधान अपने पैरों पर बिना किसी सपोर्ट के या दर्द के चलने में सक्षम थे। प्रधान ने कहा, मुझे सर्जरी के बाद काफी राहत है। उनका पिछले सप्ताह ऑपरेशन किया गया था और सिक्किम लौटने को तैयार हैं।