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भोपाल गैस त्रासदी: चौथी पीढ़ी भी भुगत रही है दुष्परिणाम

 Written By: India TV News Desk
 Published : Dec 02, 2015 12:21 pm IST,  Updated : Dec 02, 2015 12:34 pm IST

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में  31 साल पहले एक ऐसा हादसा हुआ था जिसने पूरी दुनियां को हिला दिया था। यूनियन कार्बाइड कारख़ाने से रिसी मिक गैस कितने तोलों की जाने गईं इसे

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भोपाल गैस त्रासदी: चौथी पीढ़ी भी भुगत रही है दुष्परिणाम

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 31 साल पहले एक ऐसा हादसा हुआ था जिसने पूरी दुनियां को हिला दिया था। यूनियन कार्बाइड कारख़ाने से रिसी मिक गैस कितने तोलों की जाने गईं इसे लेकर अलग-अलग आंकड़े हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने 3787 लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर चुकी है हालंकि ये संख्या ज़्यादा भी बताई जाती है। 2006 में राज्य सरकार के दायर हलफ़नामे के मुताबिक़ गैस रिसाव से 558,125 लोग धायल हुए थे जिनमें से 3,900 लोग बुरी तरह अपाहिज हो गए थे।

सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात ये है कि इतने बरसों के बाद भी गैस हादसे के शिकार लोगों की चौथी पीढ़ी भी दुष्परिणामों को भोग रही है। आलम यह है कि एक लाख की आबादी में ढाई हजार से ज्यादा बच्चे विकृति का शिकार हैं, इनमें 17 सौ बच्चे जन्मजात विकृति का शिकार पाए गए हैं। यह बात संभावना ट्रस्ट क्लीनिक के अध्ययन में सामने आई है।

अध्ययन में 20 हजार से ज्यादा परिवारों के एक लाख से अधिक लोगों की केस स्टडी की गई है। चार समान आबादी वाले समुदाय पर जो अध्ययन हुआ है, उसमें 84 में गैस से प्रभावित, प्रदूषित भूजल से प्रभावित, गैस और प्रदूषित भूजल दोनों से प्रभावित और अप्रभावित लोग शामिल हैं।

पिछले तीन सालों में क्लीनिक के शोधकर्मियों ने चिकित्सक द्वारा प्रमाणित टीबी, कैंसर, लकवा, महिलाओं का प्रजनन स्वास्थ्य तथा शिशुओं और बच्चों की शारीरिक, मानसिक व सामाजिक विकास की जानकारी इकट्ठा की है। संभावना के शोधकर्मियों ने इस आबादी में 2500 से ज्यादा ऐसे बच्चों की पहचान की है, जिनमें संभवत: जन्मजात विकृति है।

इतना ही नहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 30 चिकित्सकों ने 1700 से अधिक बच्चों को जन्मजात विकृति से ग्रस्त पाया है।

अध्ययन के फील्ड को-ऑर्डिनेटर रीतेश पाल ने मंगलवार को शोध का ब्यौरा जारी करते हुए बताया कि प्राथमिक अवलोकन से यह सामने आया है कि अपीड़ित आबादी के मुकाबले जहरीली गैस या प्रदूषित भूजल से प्रभावित आबादी में जन्मजात विकृतियों की दर कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अगले छह महीने में अध्ययन के नतीजे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जारी किए जाएंगे।

पाल की सहयोगी आफरीन ने बताया कि उन्होंने सिर्फ बच्चों की विकृति के बारे में ही जानकारी नहीं जुटाई है, बल्कि ऐसे बच्चों को इलाज मुहैया कराने में भी मदद कर रहे हैं।

उनके अनुसार, अब तक मंदबुद्धि, सेरेब्रल पाल्सी, (अंडकोष की विकृति), सिन्डेक्टिली-पालिटेक्टिली (उंगलियों की विकृति) तथा अन्य जन्मजात विकृतियों वाले 164 बच्चों को इलाज के लिए सरकारी और गैर सरकारी चिकित्सा केंद्रों में भेजा जा चुका है। इनमें से 43 बच्चों का इलाज पूरा हो चुका है।

संभावना ट्रस्ट क्लीनिक में गैस पीड़ित एवं कारखाने के पास रहने वाले प्रदूषित भूजल पीड़ित 31 हजार से ज्यादा लोग पंजीकृत हैं। इस क्लीनिक में एलोपैथी, आयुर्वेद एवं योग तीनों पैथी द्वारा समेकित इलाज दिया जाता है। क्लीनिक को चलाने के लिए भारत और ब्रिटेन के 15 हजार से अधिक लोग आर्थिक मदद करते हैं।

इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय लेखक डॉमिनिक लेपियर संभावना द्वारा संचालित स्त्री रोग क्लीनिक एवं अनौपचारिक विद्यालय के लिए धन जुटाते हैं।

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