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अजीब है प्रथा, यहां हर बड़ी बेटी को बेचना पड़ता है जिस्म

 Written By: India TV News Desk
 Published : Feb 19, 2016 02:55 pm IST,  Updated : Feb 19, 2016 02:55 pm IST

नीमच: आज जहां सारी दुनियां में ज़बरदस्ती जिस्मफ़रोशी के ख़िलाफ़ मुहिम चली हुई है वहीं हमारे देश में एक ऐसी भी जगह है जहां परिवार की बड़ी बेटी को प्रथानुसार अपना जिस्म बेचना पड़ता है।

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नीमच: आज जहां सारी दुनियां में ज़बरदस्ती जिस्मफ़रोशी के ख़िलाफ़ मुहिम चली हुई है वहीं हमारे देश में एक ऐसी भी जगह है जहां परिवार की बड़ी बेटी को प्रथानुसार अपना जिस्म बेचना पड़ता है। यहां एक समुदाय परंपरा की दुहाई दे कर अपने घर की बड़ी बेटी से जिस्मफरोशी करवाता है।

मध्यप्रदेश का मंदसौर और नीमच ज़िले देह व्यापार की वजह से सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। यहां दशकों से देह व्यापार चल रहा है और अब तो पिछले कुछे सालों में ये ''कारोबार'' फ़ैल भी गया है। अब जिस्मफ़रोशी के काम में छोटी-छोटी बच्चियों को भी झौंका जा रहा है। एक विशेष समुदाय के परिवार मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के रतलाम, मंदसौर व नीमच ज़िले में रहते है। इन तीनों ज़िलों के 68 गांवों में इस समुदाय के लोग रहते हैं। तीनों ज़िले राजस्थान की सीमा से लगे हुए हैं।

यूं तो मंदसौर व नीमच अफ़ीम की खेती के लिए जहां दुनियां में जाना जाता लेकिन देह व्यापार भी उनकी पहचान बन चुकी है। 150 साल पहले अंग्रेजों ने इन्हें यहां बसाया था और  बाद में पेट भरने के लिए देह व्यापार इनका अपना मुख्य ज़रिया बन गया।

 हैरानी भरी है इनकी दास्तां

ये समुदाय कैसे वजूद में आया इसस बारे में कोई ख़ास जानकारी नहीं मिलती है। समुदाय के लोग खुद को राजपूत बताते हैं। उनका कहना है कि उनके वंशज राजवंश के इतने वफ़ादार थे कि दुश्मनों के राज जानने के लिए वो अपनी महिलाओं को गुप्तचर बनाकर वेश्या के रूप में भेजते थे। ऐसा भी कहा जाता है कि अंग्रेज़ क़रीब 150 साल पहले इन्हें नीमच में अपने सिपाहियों की वासनापूर्ति के लिए राजस्थान से लाये थे।

इस समुदाय के लोग ग्रुप में रहते हैं, जिन्हें डेरा कहते हैं। समुदाय के अधिकतर लोग झोपड़ीनुमा कच्चे मकानों में रहते हैं। इनके बारे में यह भी कहा जाता है कि मेवाड़ की गद्दी से उतारे गये राजा राजस्थान के जंगलों में छिपकर अपने विभिन्न ठिकानों से मुग़लों से लोहा लेते रहते थे। जब सेना बिखर गई तो इन लोगों के पास रोज़ी-रोटी का कोई ज़रिया नहीं बचा चुनांचे गुज़र बसर के लिए पुरुष जहां राजमार्ग पर डकैती करने लगे वहीं अपनी महिलाओं से  वेश्वावृत्ति करवाने लगे और फिर यह परंपरा बन गई।

ऐसी है समुदाय की प्रथा

समुदाय में प्रथा के अनुसार घर में जन्म लेने वाली पहली बेटी को जिस्मफरोशी करनी ही पड़ती है। रतलाम नीमच और मंदसौर से गुजरने वाले हाई-वे पर समुदाय की लड़कियां खुलेआम देह व्यापार करती हैं। वे राहगीरों को बेहिचक अपनी ओर बुलाती हैं। इस धंधे में उनका पूरा परिवार मदद करता है।

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