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'WhatsApp पर खून से लथपथ तस्वीर देख मैं सन्न रह गई', प्रोटेस्ट में घायल सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने सुनाई दर्दभरी कहानी

 Reported By: Abhay Parashar Written By: Khushbu Rawal
 Published : Jul 31, 2026 09:44 pm IST,  Updated : Jul 31, 2026 09:50 pm IST

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रोटेस्ट के दौरान सब इंस्पेक्टर अशोक मीणा हिंसा का शिकार हुए थे। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और ड्यूटी पर तैनात रहे। इंडिया टीवी से बातचीत में अशोक मीणा की पत्नी नीरज मीणा ने उस दिन की पूरी घटना का जिक्र किया है।

जंतर-मंतर हमले में...- India TV Hindi
जंतर-मंतर हमले में घायल SI अशोक मीणा, दूसरी तस्स्वी में उनकी पत्नी और बच्चे। Image Source : REPORTER INPUT

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए हिंसक प्रदर्शन में कई पुलिस वाले गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायल पुलिसकर्मियों में से एक हैं सब इंस्पेक्टर अशोक मीणा। अशोक मीणा प्रदर्शनकारी छात्रों को संसद में घुसने से रोक रहे थे और इस दौरान पीछे से किसी प्रदर्शनकारी ने उन पर पत्थर से हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आई। उनकी टोपी और वर्दी खून से लथपथ हो गई। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। महरम पट्टी करवाकर वह ड्यूटी पर तैनात रहे। अशोक मीणा की पत्नी नीरज ने इंडिया टीवी से बातचीत की। उन्होंने बताया कि कैसे अशोक को चोट लगी? उन्हें घटना की जानकारी कैसे मिली? उस घटना से जुड़ी बहुत सारी बातें उन्होंने बताई है।

घायल सब-इंस्पेक्टर की पत्नी का छलका दर्द

सब इंस्पेक्टर अशोक मीणा की नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट में स्पेशल स्टाफ में ड्यूटी है लेकिन उनको कानून व्यवस्था संभालने के लिए जंतर-मंतर पर लगाया गया था। अशोक मीणा की पत्नी नीरज मीणा हाउस वाइफ है, एक बेटा 9वीं में है और बेटी छठी क्लास में है।

नीरज मीणा ने बताया कि 20 जुलाई की सुबह करीब पांच बजे अशोक मीणा ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। सुबह करीब 11 बजे उन्हें चोट लगने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप पर अशोक मीणा की घायल अवस्था की तस्वीर मिली, जिसे देखकर वह हैरान रह गईं। जब उन्होंने दोपहर में फोन किया तो अशोक मीणा ने बताया कि उन्होंने पट्टी करा ली है और वह दोबारा ड्यूटी पर तैनात हैं।

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Image Source : REPORTER INPUTपूर्व कमिश्नर अवार्ड लेते हुए अशोक मीणा।

'अगर उन्हें कुछ हो जाता तो जिम्मेदार कौन होता?'

नीरज मीणा ने कहा कि पुलिसकर्मी केवल अपनी ड्यूटी ही नहीं निभाते, बल्कि उनके पीछे पूरा परिवार भी होता है। पुलिसकर्मी भी इंसान हैं। घर पर पत्नी, बेटा और बेटी उनकी सलामती का इंतजार करते हैं। अगर ड्यूटी के दौरान किसी पुलिसकर्मी के साथ कोई बड़ी घटना हो जाए तो उसके परिवार की चिंता कौन करेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस हमेशा सबसे आगे खड़ी होकर कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम करती है, चाहे मौसम कैसा भी हो या परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।

उन्होंने बताया कि जिस समय हमला हुआ, अशोक मीणा संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोक रहे थे। इसी दौरान पीछे से उनके सिर पर पत्थर मारा गया। चोट लगने के बावजूद उन्होंने इलाज कराया और फिर दोबारा ड्यूटी पर लौट गए।

हिंसा की निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

नीरज मीणा ने यह भी कहा कि प्रदर्शन कई दिनों से चल रहा था और शुरुआती दिनों में सब कुछ शांतिपूर्ण था। ऐसे में जिस दिन हिंसा हुई, उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि संभव है प्रदर्शनकारियों की आड़ में कुछ दूसरे लोग भी शामिल हो गए हों, जिन्होंने पुलिस को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा सकते हैं, लेकिन पत्थर, लाठी या दूसरे हथियारों का इस्तेमाल छात्रों का तरीका नहीं हो सकता। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हों, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

देखें पूरा इंटरव्यू-

नीरज मीणा ने सरकार और पुलिस प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए भी ठोस प्रावधान किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के भी मानवाधिकार हैं और उन्हें ड्यूटी के दौरान हिंसा का शिकार बनने से बचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पुलिसकर्मियों को लगातार निशाना बनाया जाएगा तो कानून व्यवस्था बनाए रखने में भी कठिनाइयां आएंगी। इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस की सुरक्षा और उनके परिवारों की चिंता को भी गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।

वहीं, बता दें कि स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा के मद्देनजर बड़ा फैसला लिया है

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