नई दिल्ली: दलाई लामा ने सही ही कहा है कि प्रेम और करूणा इंसान की ऐसी भावनाएं हैं जिनके बिना मानवता जीवित नहीं रह सकती है। किसी के मन में करूणा जगाना मुश्किल है लेकिन यह सार्थक है। यदि ऐसी चीजें हमारे आस-पास होती हैं तो हमें इसे सराहना चाहिए। कुछ लोग होते हैं जो कुछ नहीं जानते लेकिन बहुत ही दयालू होते हैं उनके लिए कर्म ही सब कुछ होता है। आज हम आपको अखिलेश कुमार की कहानी सुनाने जा रहे हैं। यह कहानी मलयालम में लिखी गई है। और इसे फेसबुक पर शेयर किया गया है। इस कहानी को सोशल मीडिया पर लोगों ने सराहा है। केरल के रहने वाले अखिलेश कुमार जो कि दिन भर की मीटिंग करने के बाद मल्लापुरम के होटल में आए उन्हें देखते हुए वेटर उनका ऑर्डर लेने के लिए आया। ऑर्डर देने के बाद वह बैठ गए और अपने खाने का इंतजार करने लगे। तभी उन्हें होटल के बाहर दो बच्चे खड़े दिखाई दिए जोकि सभी की टेबल पर रखे खाने को देख रहे थे।
अखिलेश ने उन दोनो भाई-बहन को अंदर आने का इशारा किया और पास बुलाकर पूछा की वह क्या खाना चाहते हैं। दोनों ही कूड़ा बिनने वाले बच्चों ने सामने वाली टेबल पर रखी प्लेट की ओर इशारा किया और अखिलेश ने उनके लिए वही मंगाया। जब खाना आया तो छोटा बच्चा अपनी खुशी को बता नहीं पाया और जैसे ही उसने खाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया उसकी बहन ने उसे हाथ धोने के लिए रोक दिया। दोनो ही बच्चों ने बिना कुछ बोले खाना खत्म किया, अखिलेश को देखा और चुपचाप चले गए। अखिलेश इतना खुश था कि उसने बच्चों के जाने बाद खाना ही नहीं खाया। उसने बिल लाने के लिए कहा और जब वह हाथ धोकर अपनी टेबल पर वापस आया तो बिल देखकर हैरान रह गया क्योंकि बिल में कोई कीमत नहीं लिखी थी। उसमे केवल एक मैसेज था कि हमारे पास ऐसी कोई मशीन नहीं है जो मानवता का मूल्य बता सके, भगवान आपके साथ अच्छा करें।