
यह देखकर की उनकी कुर्सी बाकी चार कुर्सियों से आकार में बड़ी है, कलाम ने उस पर बैठने से इंकार कर दिया और उस कुर्सी पर कुलपति को बैठने के लिए कहा। जाहिर सी बात है कि कुलपति उस कुर्सी पर नहीं बैठे और उसके बाद तुरंत जनता के राष्ट्रपति के लिए एक अन्य कुर्सी का प्रबंध किया गया।
एक बार कलाम ने एक इमारत की दीवार की रक्षा के लिए उस पर टूटा कांच लगाने के सुझाव को यह कहते हुए नकार दिया था कि ऐसा करना पक्षियों के लिए नुकसानदेह साबित होगा।
एक अन्य दस्तावेज में बताया गया है कि जब डीआरडीओ में कलाम के एक अधीनस्थ सहयोगी काम के दबाव के कारण अपने बच्चों को प्रदर्शनी में नहीं ले जा सके थे तो कलाम खुद उनके बच्चों को लेकर गए ।
कलाम ने एक वैज्ञानिक के तौर पर अपना काफी समय त्रिवेंद्रम में बिताया था और केरल में उन दिनों वह उस मोची के काफी करीब थे और इसी प्रकार होटल मालिक से भी उनकी दोस्ती थी जहां वह अक्सर खाना खाने जाते थे।