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फॉगिंग से नहीं मरते डेंगू के मच्छर, हेल्थ के लिए खराब

 Written By: India TV News Desk
 Published : Oct 22, 2015 12:40 pm IST,  Updated : Oct 22, 2015 12:40 pm IST

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए तीनों नगर निगम जमकर फॉगिंग कर रहे है। लेकिन सच तो ये है कि इससे डेंगू के मच्छरों पर कोई असर नहीं

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हेल्थ के लिए खराब है फॉगिंग, विदेश में बैन

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए तीनों नगर निगम जमकर फॉगिंग कर रहे है। लेकिन सच तो ये है कि इससे डेंगू के मच्छरों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। डेंगू पर काबू पाने में यह बेअसर है। यह बात निगमों के स्वास्थय अधिकारी भी जानते है। फॉगिंग से डेंगू के मच्छर तो नहीं मरते लेकिन लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर जरूर पड़ता है।

सेहत के लिए हानिकारक है फॉगिंग

सेंट्रल फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) के शोध से भी इस बात की पुष्टि हुई है। सीएसई के मुताबिक फॉगिंग के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले डीजल और मैलाथियोन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालते हैं। इससे गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सांस की तकलीफ हो सकती है। दमे के मरीज के लिए तो फॉगिंग बहुत ही घातक साबित हो सकती है।

एक दिन की फॉगिंग 2000 कारों से निकलने वाले खतरनाक धुएं का बराबर

सीएसई का कहना है कि नगर निगम ने एक दिन में जितनी फॉगिंग की है वह 2000 कारों से निकलने वाले खतरनाक धुएं के बराबर है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक डीजल और मैलाथियोन का धुआं अस्थमा का मरीज बना सकता है। इस धुएं से बड़े मच्छर तो मर जाते है, लेकिन मच्छरों के प्रजनन को नहीं रोका जा सकता।

सीएसई के उपनिदेशक चंद्र भूषण ने बताया कि डेंगू की रोकथाम के लिए फॉगिंग तभी प्रभावी होगा जब हर 4 दिन में फॉगिंग की जाए, जो कि निगमों लिए संभव नहीं है। ऐसे में पिछले दिनों जितनी भी फॉगिंग की गई, उसमें सिर्फ पैसा बर्बाद हुआ है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डीजल और मैलाथियोन के प्रयोग पर उठाए सवाल

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डीजल और मैलाथियोन के प्रयोग पर सवाल उठाए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक फॉगिंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है लेकिन डेंगू से डरे हुए लोगों की संतुष्टी और उनके विश्वास को बचाने के लिए फॉगिंग कराई जाती है। दुनियाभर में फॉगिंग को बैन कर दिया गया है।

फॉगिंग पर 7 करोड़ रूपए फूंक चुकी है MCD

दिल्ली की तीनों एमसीडी को मिलाकर वर्षाजनित बीमारियों के लिए लगभग 5 करोड़ का बजट है लेकिन एमसीडी अब तक सिर्फ फॉगिंग पर ही करीब 7 करोड़ हवा में उड़ा चुकी है। अब उल्टा वहीं एमसीडी फॉगिंग पर सवाल उठा रही है। 

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