
अनुपम खेर ने कहा, “मैं उन पत्रकारों से सवाल करना चाहता हूं कि क्या आपने कभी कैप्टन पवन कुमार जो कश्मीर में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए उनके परिवार का आधा घंटे का भी इंटरव्यू लेने की कोशिश की, जेएनयू के छात्र कौन थे? क्या आपने हनुमनथप्पा की विधवा का इंटरव्यू लिया? और यहां आप एक लड़के को नए योद्धा के तौर पर पेश कर रहे हैं, जो यह कहता है कि सेना के जवान कश्मीर में महिलाओं के साथ बलात्कार करते हैं, वो (कन्हैया कुमार) ऐसा कैसे कह सकता है।”
उन्होंने कहा, “ऐसा मालूम होता है कि हीरो की परिभाषा अब बदल गई है। हमारे हीरो वो लोग होने चाहिए जो असल मायने में हैं जैसे कि सचिन तेंदुलकर, सानिया मिर्जा, सायना नेहवाल, धोनी और कैप्टन पवन कुमार। ये लोग वास्तव में हीरो हैं क्योंकि इन्होंने देश के लिए कुछ किया है, लेकिन मैं कन्हैया कुमार जैसे लोगों को कभी राष्ट्रीय हीरो नहीं बनने दे सकता।”
जेएनयू मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख पर पूछे गए सवाल पर अनुपम खेर ने कहा, “मैं राहुल के खिलाफ बिल्कुल भी नहीं हूं। वो एक ईमानदार व्यक्ति और अनिच्छुक राजनेता हैं। ऐसा मेरा निजी तौर पर मानना है, जो गलत भी हो सकता है कि, राजनीति उनपर जबरन थोपी गई है, वो कुछ और करके भी खुश रह सकते थे, मै गलत नजरिए से यह बात नहीं कह रहा हूं।”
उन्होंने कहा कि मैने सुना है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने थे और वो राजनीति में नहीं आना चाहते थे, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। खेर ने कहा, “मैं राहुल को सलाह देना चाहता हूं कि उन्हें अपने व्यक्तित्व पर ध्यान देना चाहिए लेकिन वहां कई लोग हैं जो उन्हें बढ़ावा देते रहते हैं। अगर आप संसद मे देखो तो उनके आस पास कम से कम 5 से 6 लोग होते हैं जो उन्हें घेरे रहते हैं और देखते रहते है कि वो उन लाइनों को याद कर रहे हैं जो उन्हें बोलने के लिए कही गई हैं।“