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आप की अदालत में बोले अनुपम खेर 'हां मैं मोदी का चमचा हूं'

 Written By: India TV News Desk
 Published : Mar 12, 2016 03:46 pm IST,  Updated : Mar 12, 2016 05:16 pm IST

अनुपम खेर ने कहा कि वो किसी की बाल्टी होने के बजाए मैं नरेंद्र मोदी का चमचा कहलाना ज्यादा पसंद करेंगे।

Aap Ki adalat
Aap Ki adalat

अनुपम खेर ने कहा, “मैने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दो बार मुलाकात की है एक बार एक मार्च के डेलिगेशन के तौर पर और दूसरी बार एक किताब की लॉन्चिंग के मौके पर। मेरा प्रधानमंत्री से सीधा कोई नाता नहीं है, लेकिन हमारे पास एक ऐसा प्रधानमंत्री है जो लगातार देश के बारे में बात करते है। इससे पहले किसी भी पीएम ने लाला किले की प्राचीर से महिलाओं के लिए शौचालय के मुद्दे पर बात नहीं की है। हमारे बच्चे स्कूलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुणगान क्यों नहीं कर सकते हैं। बच्चे के तौर पर स्कूल में हम लाल बहादुर शास्त्री के नारे लगाया करते थे, आखिर समस्या क्या है।”

उन्होंने कहा, “यहां एक व्यक्ति है जो लगातार दिन-रात मेहनत करता है, वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने हमारे देश की छवि को दुनिया की नजरों में बदला है, लेकिन आलोचक उनके हर काम में उन्हें नीचा दिखाने के लिए कमियां निकालने में जुटे हैं। लेकिन सच्चाई की रौशनी हमेशा पहाड़ की चोटी पर चमकती है, भले ही दूरी से यह मंद ही क्यों न हो जाए।”

कोलकाता में आयोजित टेलीग्राफ के एक कन्क्लेव के दौरान सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज ए के गांगुली पर बरसने के सवाल पर उन्होंने कहा, “वो मेरे अंदर बैठा एक भारतीय था जो अचानक धधक पड़ा जिसने उन्हें बताया कि उनका बयान दुर्भाग्यपूर्ण था। मनोवैज्ञानिक रूप से उस वक्त मेरे जहन में फिल्म सारांश में निभाए एक गुस्सैल बूढ़े आदमी का किरदार था।”  

खेर ने कहा, “गांगुली साहेब (पूरे सम्मान के साथ) ने संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरु की फांसी के तरीके पर सवाल उठाया था। मैं गुस्से में था क्योकि अफजल गुरु को पूरी न्यायिक प्रक्रिया के तहत फांसी दी गई थी और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की तरफ से इस तरह का बयान सामने आता है। यह शर्मिंदा करने वाला है, आप किस तरह का संदेश लोगों को देना चाहते हैं, मैने फैसला किया था कि राजनयिक जवाब पर्याप्त नहीं होगा। हम ऐसे लोगों को कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं जो देश को तोड़ने वाले नारों को समर्थन देते हैं। आप शहीद हनुमनथप्पा के परिवार से पूछिए जो बर्फ की चादर के 25 फीट नीचे 6 दिनों तक दबा रहा। कैसे लगता है जब कोई बरबादी के नारे लगाता है। मीडिया का एक वर्ग क्या साबित करने की कोशिश कर रहा है।”

अगली स्लाइड में पढ़ें अनुपम खेर ने और क्या कहा

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