नई दिल्ली: दादरी कांड के मुद्दे पर साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने पर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने सवाल उठाते हुये अपने फेसबुक पेज पर पूछा है कि यह विरोध सचमुच का है या गढ़ा हुआ? क्या ये वैचारिक असहनशीलता का मामला नहीं है?
उन्होंने कहा पिछली सरकारों ने बड़े पैमाने पर वाम विचारधारा या नेहरूवादी विचारधारा की ओर झुकाव रखने वाले लेखकों को मान्यता दी थी, उनमें से कुछ इस मान्यता के हकदार रहे होंगे।
वित्त मंत्री ने कहा कि न तो मैं उनकी अकादमिक प्रतिभा पर सवाल उठा रहा हूं और न ही मैं उनके राजनीतिक पूर्वाग्रह रखने के अधिकार पर सवाल उठा रहा हूं। उनमें से कई लेखकों ने मौजूदा प्रधानमंत्री के खिलाफ उस वक्त भी आवाज बुलंद की थी जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
जब केंद्र में मोदी सरकार बनी तो ऐसे लेखकों की बेचैनी बढ़ गई, जिन्हें पुरानी व्यवस्था में सरंक्षण मिला हुआ था।
जेटली ने लिखा कि ऐसे लोगों को पता है कि कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है और वाम हाशिए पर आ चुका है। ऐसे में अब बीजेपी और मोदी विरोधियों ने दूसरी तरह से राजनीति का रास्ता चुना है। ये दिखाने की कोशिश की जा रही है कि मोदी सरकार में माहौल खराब हो रहा है।
जेटली ने कहा कि केंद्र को वैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जो राज्यों की कानून-व्यवस्था का मामला है। जेटली ने दादरी की घटना पर कहा कि ऐसी घटनाओं से देश की छवि खराब होती है।