मुंबई: शिवसेना ने एआईएमआईएम नेता असद्दुदीन ओवैसी को भारत माता की जय कहने से इंकार करने पर आड़े हाथ लिया तथा मांग की कि इस नारे को लगाने से इंकार करने वालों की नागरिकता एवं मतदान का अधिकार वापस ले लेना चाहिए जबकि उत्तर प्रदेश में अधिकारियों ने ओवैसी को दो आयोजन करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया।
लातूर में ओवैसी के हालिया बयान को लेकर मामला गर्माने के बीच शिवसेना ने अपने गठबंधन के सहयोगी दल के नेता एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणीस से यह पूछा कि देश का अपमान करने के बाद उसे राज्य से चले जाने देने की अनुमति कैसे दी गई। पार्टी के मुखपत्र सामना में बेहद तीखे संपादकीय में शिवसेना ने कहा, हार्दिक पटेल ने गलती से राष्ट्रीय ध्वज का अपमान कर दिया था और उसपर देशद्रोह का मुकदमा लगाया गया, वह अब भी जेल में है। क्या भारत माता का अपमान करके असदुद्दीन ओवैसी ने भी देशद्रोह नहीं किया है? जो लोग भारत माता की जय नहीं कहते हैं, उनकी नागरिकता और मताधिकार छीन लिए जाने चाहिए।
संपादकीय में कहा गया, राज्य में मुख्यमंत्री भाजपा के हैं। उन्हें यह जवाब देना होगा कि देश का अपमान करने के बाद ओवैसी को लातूर से जाने कैसे दिया गया? शिवसेना ने एमआईएमआई के नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि ओवैसी जैसे लोगों के विचारों के कारण ही मुस्लिम समुदाय अब तक पिछड़ा है। हालांकि एमपीसीसी के प्रवक्ता अल-नसीर जकारिया ने आरोप लगाया कि शिवसेना सिर्फ पाखंड की राजनीति कर रही है।
जकारिया ने कहा, उन्हें (शिवसेना को) यह समझना चाहिए कि उन्हें तभी गंभीरता से लिया जाएगा, यहां तक कि उनके अपने सहयोगी भाजपा द्वारा भी उन्हें तभी गंभीरता से लिया जाएगा, जब वह खुद बेदाग निकलकर आएंगे। सिर्फ नारे लगाने से वे राष्ट्रवादी नहीं बन जाएंगे।