नई दिल्ली: बेहद रूढ़िवादी और भारत का सबसे पिछड़ा राज्य माना जाने वाला बिहार डिजिटल होने जा रहा है। अब राज्य की पुलिस स्मार्टफोन के जरिए और चौकस होने जा रही है। दरअसल बिहार सरकार ने पुलिस को स्मार्टफोन थमाने की योजना बनाई है, जिसमे WhatsApp, Facebook और Twitter जैसे फीचर होंगे, जिनकी मदद से वो अधिकारियों और अपने कलीग से बेहतर संचार स्थापित कर पाएंगे।
इंस्पेक्टर जर्नल पंकज दराड़ ने बताया कि एसएचओ से लेकर डीजीपी रैंक तक के सभी पुलिस अधिकारियों को एंड्रॉयड स्मार्टफोन दिए गए हैं ताकि राज्य स्तर पर आपसी सामंजस्य को और बेहतर किया जा सके। स्मार्टफोन के इस्तेमाल से थाने से लेकर राज्य स्तर के पुलिस अधिकारियों को जोड़ा जाएगा। सरकार और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि एंड्रॉयड फोन के इस्तेमाल से अधिकारी सूचनाओं और दस्तावेजों के आसानी और तेजी के साथ एक दूसरे को पहुंचा पाएंगे, जैसा कि पहले नहीं हो पाता था। यह पूरी तरह से सही और तथ्यपरक बात है जिसका आजकल के जमाने में स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले लोग भी समर्थन करते हैं।
प्रोजक्ट की लागत:
इस पूरे प्रोजक्ट में करीब 2.08 करोड़ का खर्चा आने का अनुमान है। इसके जरिए पुलिस वालों के लिए वो स्मार्टफोन खरीदे जाएंगे जिनका औसत मूल्य करीब 15,000 रुपए है। बिहार के गृह मंत्रालय ने भी बिहार के पुलिस वालों को स्मार्टफोन थमाए जाने के इस प्रस्ताव को पास कर दिया है। खरीदे जाने वाले स्मार्टफोन में करीब 940 हैंडसेट्स एसएचओ स्तर के अधिकारियों को थमाए जाएंगे जबकि बाकी मोबाइल बड़े अधिकारियों को दिए जाएंगे। यह कदम मौजूदा दौर में इस्तेमाल किए जाने वाले फीचर फोन और वायरलैस वॉकी-टॉकी से काफी आगे का कदम है। इस फोन को पाने वाले पुलिस अधिकारियों के लिए यह जरूरी होगा कि वो Email, WhatsApp, Facebook और Twitter जैसे फीचर उसमें इंस्टॉल करें, ताकि वो अपने साथियों और अधिकारियों से लगातार संपर्क में रह सकें।