
सितंबर से शुरू हो जाती है बजट बनने की प्रक्रिया:
फरवरी में पेश होने वाले बजट के लिए सितंबर महीने से ही तैयारी शुरू हो जाती है। सभी मंत्रालयों और विभागों को सर्कुलर भेज कर वित्तीय वर्ष के लिए किए जाने वाले खर्चों, फंड और आगामी परियोजनाओं का पूरा ब्यौरा मांग लिया जाता है। इसे आप बजट का पहला स्टेप और उसकी रुपरेखा तैयार करना मान सकते हैं।
नवंबर में होती है रायसीना हिल्स पर मीटिंग:
आमतौर पर वित्त मंत्रालय से जुड़े अहम अधिकारी नवंबर में रायसीना हिल्स के नार्थ ब्लॉक में स्टेक होल्डर्स के साथ सलाह-मशविरा शुरु करते हैं। यहां पर टैक्स छूट और राजकोषीय प्रोत्साहन की सीमा पर बहसें होती हैं। वित्त वर्ष की बड़ी संभावनाओं को मद्देनजर रखते हुए हित धारकों के साध वित्त मंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक होती है। इस बैठक में सत्तारुढ़ पार्टी अपने सहयोगियों की इच्छाओं के हिसाब से कुछ फेरबदल भी करती है।