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#Budget2016: कैद हो जाते हैं बजट बनाने वाले अधिकारी, परिवार से बात भी नहीं कर सकते

 Written By: India TV News Desk
 Published : Feb 19, 2016 05:56 pm IST,  Updated : Feb 19, 2016 06:58 pm IST

हर साल पेश होने वाले बजट से जुड़ी सबसे खास बात यह होती है कि वित्त मंत्रालय से जुड़े वो सभी अधिकारी जिनकी बजट बनाने की प्रक्रिया में भूमिका होती है उन्हें एक तरह की कैद दे दी जाती है।

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नई दिल्ली: हर साल पेश होने वाले बजट से जुड़ी सबसे खास बात यह होती है कि वित्त मंत्रालय से जुड़े वो सभी अधिकारी जिनकी बजट बनाने की प्रक्रिया में भूमिका होती है उन्हें एक तरह की कैद दे दी जाती है। आसान शब्दों में कहा जाए तो ये सभी करीब एक हफ्ते के लिए बाहरी दुनिया से कट जाते हैं और इन्हें नॉर्थ ब्लॉक में कैद कर लिया जाता है।

कौन कौन होता है कैद:

कैद होने वाले अधिकारियों में वित्त मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के साथ, विशेषज्ञ, प्रिंटिंग टेक्नीशियन और कुछ स्टेनोग्राफर्स को नॉर्थ ब्लॉक में करीब 7 दिन की कैद मिलती है। यानी से लोग बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं। यहां तक कि ये इस दौरान अपने परिवार से भी बात नहीं कर सकते। अगर परिजनों को अपने पारिवारिक सदस्य को कोई बहुत जरूरी सूचना भी देनी होती है तो वो दिए गए एक नंबर पर सिर्फ संदेश भर भेज सकते हैं।

क्यों दी जाती है कैद:

बजट तैयार करने वाले अधिकारियों को इस तरह की कैद देने के पीछे का कारण गोपनीयता है। बजट टीम के सभी सदस्यों पर पैनी नजर रखी जाती है। इंटेलिजेंस ब्यूरो की एक टीम हर किसी की गतिविधि और उनके फोन कॉल्स पर बराबर नजर रखती है। यह टीम संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में काम करती है। सबसे ज्यादा निगरानी स्टेनोग्राफरों की होती है। साइबर चोरी की संभावनाओं से बचने के लिए स्टेनोग्राफर के कम्प्यूटर नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (nic) के सर्वर से दूर होते हैं। जहां ये सारे लोग होते हैं वहां एक पावरफुल जैमर लगा होता है ताकि कॉल्स को ब्लॉक किया जा सके और किसी भी जानकारी को लीक न होने दिया जाए। बजट तैयार होने के दौरान स्टेनोग्राफर और अन्य अधिकारी जिस जगह पर काम करते हैं वहां पर वित्त मंत्री और इंटेलिजेंस ब्यूरो चीफ औचक निरीक्षण भी कर सकते हैं।

कहां छपता है बजट:

जैसा कि वित्त मंत्री का बजट भाषण सबसे सुरक्षित दस्तावेज होता है। इसलिए इसे बजट की घोषणा के दो दिन पहले ही प्रिंटर्स को थमाया जाता है। आपको बता दें कि पहले बजट के पेपर्स राष्ट्रपति भवन के अंदर प्रिंट होते थे, लेकिन साल 1950 के बजट के लीक हो जाने के बाद बजट मिंटो रोड के एक प्रेस में छपने लगा। साल 1980 से बजट नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में छप रहा है।  

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