नई दिल्ली: फरवरी के आखिरी वर्किंग डे पर पेश होने वाले आम बजट पर इस बार हर किसी की निगाहे हैं। जहां एक ओर 29 फरवरी को आम बजट पेश होगा वहीं 25 फरवरी को रेल बजट पेश किया जाएगा। हममे से हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर एक ही सरकार रेल और आम बजट को अलग अलग क्यों पेश करती है। इसके पीछे एक खास कारण है। हम अपनी बजट सीरीज की इस कड़ी में आपको यही कारण बताने की कोशिश करेंगे।
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क्या थी वजह:
आपको बता दें कि एक अंग्रेज के सुझाव पर ही रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया। साल 1921 ईस्ट इंडिया रेलवे कमिटि के चेयरमैन सर विलियम एक्वर्थ को महसूस हुआ कि रेलवे एक बड़ा महकमा है और इसे एक बेहतर प्रबंधन (मैनेजमेंट) की जरूरत है। साल 1924 में उन्होंने प्रस्ताव रखा कि रेल बजट को आम बजट से अलग किया जाए। विलियम के इस प्रस्ताव पर गौर करने के लिए एक 10 सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इस समिति ने इस प्रस्ताव को सही मानते हुए रेल बजट को सामान्य बजट से अलग पेश करने का सुझाव दिया। इसके पीछे का तर्क यह था कि रेलवे भारत की आर्थिक गतिविधियों का सबसे बड़ा संचालक था। साल 1924 में पूरे देश के बजट में अकेले रेलवे की 70 फीसदी हिस्सेदारी हुआ करती थी। बजट में इतनी बड़ी हिस्सेदारी को देखते हुए विलियम के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। इस दिन से ही हर साल रेल बजट आम बजट से अलग पेश किया जाने लगा।