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बजट घाटा (Budgetary deficit):
ऐसी स्थिति तब उत्पन्न होती है जब आपके खर्चे प्राप्त राजस्व से अधिक हो जाते हैं।
बजट अनुमान (Budget estimates):
इस तरह के अनुमान में एक साल का राजकोषीय एवं राजस्व घाटा शामिल होता है। इस शब्द का मतलब यह होता है कि एक वित्तीय वर्ष के दौरान क्रेंद सरकार ने कितना खर्चा किया और उसे कर राजस्व के जरिए कितनी आमदनी हुई।
बॉन्ड (Bond):
यह कर्ज का एक प्रमाणपत्र होता है जिसे कोई सरकार और कार्पोरेशन जारी करता है ताकि पैसा जुटाया जा सके।
बियर (Bear):
एक निवेशक जो बाजार को निराशावादी नजरिए से देखता है। ऐसा निवेशक बाजार में कीमतों में गिरावट की उम्मीद रखता है, ताकि वह अभी अपना माल बेच दे (गिरावट होने से पहले) जिससे कि उसे मुनाफा मिले और कीमतें गिरने के बाद वो उसे फिर से खरीद ले, ताकि भविष्य में अगर तेजी आए तो उसे फायदा हो। शेयर बाजार की भाषा में इसे मंदड़िया भी कहा जाता है।
बुल (bull):
यह एक ऐसा निवेशक होता है जो बाजार को आशा की नजर से देखता है और वो भविष्य में कीमतें बढ़तें की संभावना को भांपते हुए खरीदारी करता है और बाद में कीमतें बढ़ने पर उसकी बिक्री कर देता है। शेयर बाजार की भाषा में इसे तेजड़िया भी कहा जाता है।
सेनवैट (CENVAT):
केंद्रीय मूल्य वर्धित कर (सेनवैट) एक तरह का उत्पाद शुल्क है जो मैन्यूफैक्चरर (निर्माताओं) पर लगाया जाता है। इस टर्म को साल 2000-2001 के बजट में पेश किया गया था।
कॉरपोरेट टैक्स (Corporate tax):
इस तरह का टैक्स कार्पोरेट संस्थानों का फर्मों पर लगाया जाता है, जिसके जरिए आमदनी होती है।
सीमा शुल्क (Customs duties):
इस तरह का शुल्क उन वस्तुओं पर लगाया जाता है जो या तो देश में आयातित की जाती है और या फिर देश के बाहर उनका कहीं निर्यात किया जाता है। आयातक और निर्यातक इस शुल्क को अदा करते हैं।
चालू खाता घाटा (Current account deficit):
इस तरह का घाटा राष्ट्रीय आयात और निर्यात के बीच के अंतर को दर्शाता है।
डॉयरेक्ट टैक्स (Direct taxes):
इस तरह का कर व्यक्ति और संस्थानों की आय और उसके स्त्रोत पर लगता है। सामान्य तौर पर यह संपत्ति और आमदनी पर इनकम टैक्स, कारपोरेट टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स और इनहेरिटेंस टैक्स के जरिए लगता है।
विनिवेश (Disinvestment):
आसान शब्दों में इसका मतलब यह होता है कि सरकार किसी संस्थान या फर्म में अपनी हिस्सेदारी का कुछ फीसदी हिस्सा किसी प्राइवेट फर्म को बेच देता है। ऐसा आमतौर पर इसलिए किया जाता है ताकि कंपनी के प्रदर्शन को सुधारा जा सके और सरकार के राजस्व में भी कुछ इजाफा हो।
उत्पाद शुल्क (Excise duties):
एक देश की सीमाओं के भीतर बनने वाले सभी उत्पादों पर लगता है।
राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit):
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल खर्च और राजस्व प्राप्तियों एवं गैर ऋण पूंजी प्राप्तियों का योग के बीच का अंतर है।
जीडीपी (GDP):
एक वित्तीय वर्ष में किसी देश की सीमा के भीतर बनने वाली कुल वस्तुओं एवं सेवाओं के योग को सकल घरेलू उत्पाद कहा जाता है।