पटना: बिहार का सबसे बड़ा और सर्वाधिक लोकप्रिय चार दिवसीय छठ पर्व रविवार तड़के शुरू हो गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु नदी तटों पर उमड़ पड़े। ये श्रद्धालु स्नान के बाद पारंपरिक भोजन पकाएंगे। छठ पर्व दिवाली के छह दिन बाद मनाया जाता है। यह भगवान सूर्य की उपासना का पर्व है।
इस पर्व के दौरान सुहागिन महिलाएं 36 घंटे का व्रत रखती हैं और श्रद्धालु सूर्य को गेंहू, दूध, गन्ना, केला और नारियल चढ़ाते हैं। गंगा, पुनपुन, गंडक और कोसी जैसी बड़ी नदियां और छोटे जलाशयों के किनारे श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं। श्रद्धालु मिट्टी के चूल्हों पर भोजन पकाने में व्यस्त हैं।
एक महिला श्रद्धालु संजू देवी ने कहा, "हम छठ के पहले दिन उबले चावल और कद्दू का पारंपरिक भोजन पकाने के लिए आम के पेड़ की सूखी लकड़ी और बांस की टोकरियों का इस्तेमाल करते हैं।"
अकेले पटना में सड़क किनारे हजारों की संख्या में पुरुष और महिलाएं आम के पेड़ की सूखी लकड़ियां और विभिन्न आकार की बांस की टोकरियां बेच रहे हैं, जिन्हें स्थानीय लोग सूप या टोकरी कहते हैं।
नई सूती साड़ी पहने महिला श्रद्धालु महुआ देवी ने कहा, "हम छठ पर्व के शुरू होने के उपलक्ष्य में पहले खुद को स्वच्छ करने के लिए स्नान करते हैं और उसके भोजन पकाते हैं।" उन्होंने कहा कि नहाय-खाय छठ पर्व के अगले चरण के दौरान शुद्धता और सख्त अनुशासन का एक प्रतीक है।
छठ व्रत रखने वाले को व्रती कहते हैं। व्रती ही सूर्योपासना करते हैं और अन्य कर्मकांड में भाग लेते हैं।
उल्लेखनीय है कि छह के दूसरे दिन सोमवार को खरना होगा। इस दिन सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है। यह भगवान सूर्य के प्रति आस्था, निष्ठा और समर्पण का एक पर्व है। सात घोड़े जुते रथ पर सवार भगवान सूर्य की मूर्तियां नदियों के किनारे बेची जा रही हैं।
प्रशासन हजारों स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर नदी घाटों और जलाशयों की ओर जाने वाले मार्गो की चौबीस घंटे साफ-सफाई में जुटा हुआ है। जिला प्रशासन ने कुछ घाटों को असुरक्षित और खतरनाक घोषित कर रखा है। पटना में गंगा किनारे 72 से अधिक घाट हैं।
एक अधिकारी ने कहा, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।"