नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को कोलेजियम से उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कहा। यह काम सरकार द्वारा एनजेएसी के गठन की अधिसूचना को चुनौती दिए जाने के बाद से रुका हुआ है।
न्यायमूर्ति जगजीत सिंह केहर की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी रह सकती है। अदालत ने गुरुवार को सरकार और अन्य याचिकाकर्ताओं के उन सुझावों पर अपने आदेश को सुरक्षित रखा जिनमें कॉलेजियम प्रणाली में सुधार और इसे पारदर्शी बनाने की बात कही गई है।
पीठ ने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली में सुधार पर बहस पूरी हो गई है। साथ ही कहा कि कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी रहेगी और इसे रोका नहीं जाएगा।
क्या है कॉलेजियम व्यवस्था?
कॉलेजियम पांच लोगों का समूह है। इन पांच लोगों में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज है। कोलेजियम द्वारा जजों के नियुक्ति का प्रावधान संविधान में कहीं नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पांच वरिष्ठतम जजों की कमेटी (कोलेजियम) नियुक्ति व तबादले का फैसला करती है। कोलेजियम की सिफारिश मानना सरकार के लिए जरूरी होता है। यह व्यवस्था 1993 से लागू है।
कॉलेजियम प्रणाली सुप्रीम कोर्ट की दो सुनवाई का नतीजा है। पहला 1993 का और दूसरा 1998 का है। कॉलेजियम बनाने के पीछे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने की मानसिकता सुप्रीम कोर्ट की रही। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने जजों की नियुक्ति के लिए संविधान में निहित प्रावधानों को दुबारा तय किया और जजों के द्वारा जजों की नियुक्ति का अधिकार दिया। कॉलेजियम किसी व्यक्ति के गुण-कौशल के अपने मूल्यांकन के आधार पर नियुक्ति करता है और सरकार उस नियुक्ति को हरी झंडी दे देती है।