नई दिल्ली: सम विषम योजना से सांसदों को छूट के मुद्दे पर बुधवार को लोकसभा सचिवालय और दिल्ली सरकार में टकराव की स्थिति दिखी। एक वरिष्ठ संसद अधिकारी ने सांसद विशेष बस सेवा बंद करने के लिए आप सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि लोकसभा सचिवालय सांसदों का ध्यान रखने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है।
आनन फानन में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में लोकसभा सचिवालय के सचिव डी भल्ला ने दिल्ली सरकार को याद दिलाया कि संसद दिल्ली सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गयी बस सेवा के लिए भुगतान कर रहा थी।
उन्होंने कहा, हमने इस तरह की किसी मदद उपलब्ध कराने के लिए उनसे (आप सरकार) कोई अनुरोध नहीं किया था। यह उनकी पेशकश थी। यह कहना हास्यास्पद है कि वे ऐसा सांसदों के लिए कर रहे थे। हमें किसी की रहम की जरूरत नहीं है और दिल्ली सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जा रही बस सेवा कोई निशुल्क नहीं थी। संसद सचिवालय को हर बस के लिए प्रति दिन 12,000 रपए का भुगतान करना होता। चूंकि इसका इस्तेमाल नहीं हुआ, हमने उनसे ना कह दिया।
भल्ला ने योजना से सांसदों के छूट के योग्य ना होने पर हैरानी जताते हुए कहा, क्या विधेयकों पर चर्चा के लिए संासदों का संसद आना महत्वपूर्ण नहीं है? चाहे सांसद संसद या स्थायी समितियों की बैठक में हिस्सा लेने आए वे दिल्ली सहित देश के लोगों से जुड़े फैसले लेने के लिए यहां आते हैं।
उन्होंने साथ ही कहा, हालांकि हम इसे दिल्ली सरकार के विवेक पर छोड़ते हैं। हम दिल्ली सरकार से नाराज नहीं है। क्या किसी सांसद ने यह कहा कि वह सम विषम योजना के खिलाफ है। हम योजना का स्वागत करते हैं।
सम विषम योजना को देखते हुए सांसदों को संसद पहुंचाने-वापस ले जाने के लिए दिल्ली परिवहन विभाग (डीटीसी) की छह बसों को सांसद विशेष बसों में तब्दील किया गया था। लेकिन सांसदों से अच्छी प्रतिक्रिया ना मिलने के बाद दिल्ली सरकार ने शुरू होने के दो दिन बाद ही मंगलवार को उसे बंद कर दिया।